Ranchi News: शादी का झांसा देकर यौन शोषण करने और धमकी देने के आरोपी अविनाश कुमार को अदालत से बड़ा झटका लगा है। सिविल कोर्ट रांची के न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका (Anticipatory Bail) को सिरे से खारिज कर दिया है। यह मामला महिला थाना कांड संख्या XX/2026 से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला?
मामले की शिकायतकर्ता Ruma (परिवर्तित नाम) द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार:
- वर्ष 2021 में फेसबुक (Facebook) के जरिए उसकी पहचान अविनाश कुमार से हुई थी।
- आरोपी ने खुद को अपनी पत्नी से अलग रहने की बात कहकर पीड़िता को शादी का भरोसा दिलाया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।
- आरोप है कि बाद में अविनाश शादी के वादे से मुकर गया और पीड़िता को प्रताड़ित करने लगा। शिकायत के मुताबिक, 24 दिसंबर 2025 को आरोपी ने पीड़िता के साथ जबरन शारीरिक संबंध भी बनाए।
- इस बीच पीड़िता को पता चला कि आरोपी न सिर्फ पहले से विवाहित है, बल्कि अन्य महिलाओं के साथ भी उसके संबंध हैं। जब पीड़िता ने इसका विरोध किया, तो आरोपी ने उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दीं।
अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें
- बचाव पक्ष (आरोपी के वकील): अदालत में दलील दी गई कि शिकायतकर्ता एक वयस्क (Adult) और तलाकशुदा महिला है। दोनों के बीच जो भी संबंध बने, वे पूरी तरह से आपसी सहमति (Consensual) से बने थे, इसलिए यह अपराध की श्रेणी में नहीं आता।
- अभियोजन पक्ष (सरकारी वकील): जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा गया कि आरोपी ने पीड़िता के साथ धोखे और झूठे आश्वासन (शादी का झांसा) के आधार पर संबंध बनाए, जो कानूनन अपराध है।
कोर्ट का रुख: क्यों नहीं मिली राहत?
अदालत ने केस डायरी और जांच के दौरान पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों का बारीकी से अवलोकन किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने पाया कि आरोपी के खिलाफ बेहद गंभीर आरोप हैं।
अदालत की तल्ख टिप्पणी:
न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा की अदालत ने आदेश में साफ कहा कि जांच के दौरान मिले संकेतों से प्रतीत होता है कि आरोपी इस तरह के अपराधों में संलिप्त रहने का आदी (Habitual Offender) है। चूंकि मामले की जांच अभी जारी है और साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी से हिरासत में पूछताछ (Custodial Interrogation) आवश्यक है, इसलिए उसे अग्रिम जमानत की राहत नहीं दी जा सकती।

