Ranchi News: महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ी पहल करते हुए झारखंड स्टेट बार काउंसिल के सदस्य और अधिवक्ता संजय कुमार विद्रोही ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर देश की न्यायिक और संवैधानिक व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन का प्रस्ताव दिया है । विद्रोही ने मांग की है कि बार काउंसिल में महिलाओं के लिए 30% प्रतिनिधित्व के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बनाकर इसे देश की सभी प्रमुख संस्थाओं और न्यायपालिका के हर स्तर पर लागू किया जाए ।

1. जिला न्यायालय से सुप्रीम कोर्ट तक 30% महिला आरक्षण की मांग
संजय विद्रोही ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि महिला सशक्तिकरण केवल भाषणों और नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए । उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि जिला अदालतों, उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में न्यायिक नियुक्तियों और बहाली में महिलाओं के लिए न्यूनतम 30% भागीदारी अनिवार्य की जाए । उनका तर्क है कि जब न्याय देने वाली कुर्सियों पर महिलाओं की संख्या बढ़ेगी, तभी न्याय व्यवस्था अधिक संवेदनशील और संतुलित बनेगी ।
2. नेतृत्वकारी पदों (Office Bearers) पर वास्तविक भागीदारी
पत्र में एक महत्वपूर्ण बिंदु यह उठाया गया है कि 30% आरक्षण केवल सदस्य संख्या तक सीमित न रहे । विद्रोही ने मांग की है कि अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे निर्णय लेने वाले पदों पर भी महिलाओं का स्पष्ट अनुपात निर्धारित हो । उनका मानना है कि महिलाओं को केवल कार्यकारिणी सदस्य बनाकर मुख्य पदों से दूर रखना आरक्षण की मूल भावना के खिलाफ होगा ।
3. ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए राष्ट्रीय नीति की आवश्यकता
विद्रोही ने समाज के सबसे उपेक्षित ट्रांसजेंडर समुदाय की आवाज भी बुलंद की है । उन्होंने पीएम मोदी से आग्रह किया है कि ट्रांसजेंडर समाज को केवल सहानुभूति की नहीं, बल्कि संवैधानिक सम्मान और संस्थागत प्रतिनिधित्व की जरूरत है । उनके लिए शिक्षा, रोजगार और न्यायिक संस्थाओं में भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु एक अलग राष्ट्रीय आरक्षण नीति और विधेयक लाने की मांग की गई है ।
4. इन प्रमुख संस्थाओं में प्रतिनिधित्व अनिवार्य करने का सुझाव
पत्र के माध्यम से निम्नलिखित क्षेत्रों में 30% महिला प्रतिनिधित्व लागू करने का प्रस्ताव दिया गया है:
- सभी वैधानिक निकाय (Statutory Bodies) और आयोग ।
- बोर्ड, निगम, परिषद और चयन समितियाँ ।
- न्यायिक सेवा और उच्चतर न्यायिक सेवा की नियुक्तियाँ ।
- सभी पंजीकृत संघ और पेशेवर संगठन ।
5. केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप की अपील
विद्रोही ने सुझाव दिया है कि भारत सरकार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक हस्तक्षेप आवेदन (Intervention Application) दाखिल करना चाहिए । इसके जरिए सरकार यह निवेदन करे कि बार काउंसिलों के लिए तय 30% महिला प्रतिनिधित्व के मार्गदर्शक सिद्धांतों को न्यायपालिका और अन्य सभी संबंधित संस्थाओं में भी विस्तारित किया जाए ।
निष्कर्ष: संजय कुमार विद्रोही का यह पत्र “विकसित भारत” और “नारी शक्ति” के संकल्प को धरातल पर उतारने की एक गंभीर कोशिश है । उन्होंने प्रधानमंत्री से एक ऐतिहासिक विधायी पहल की उम्मीद जताई है, ताकि भारत महिला सशक्तिकरण और समावेशी लोकतंत्र का वैश्विक मॉडल बन सके । इस पत्र की प्रतियां विधि एवं न्याय मंत्री, मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रीय महिला आयोग को भी प्रेषित की गई हैं ।