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Ranchi CBI Court News: बिटुमेन घोटाला: तीन दशक बाद आया फैसला, ट्रांसपोर्टर समेत चार को 3-3 साल की कारावास, तीन बरी

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By CourtNews Desk On 24 Apr, 2026
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Ranchi News: बहुचर्चित बिटुमेन (अलकतरा) घोटाला मामले में शुक्रवार को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने अपना कड़ा रुख अख्तियार किया। न्यायालय ने भ्रष्टाचार और सरकारी संपत्ति के गबन के मामले में मेसर्स विनय कुमार सिन्हा (ट्रांसपोर्टर) सहित चार दोषियों को तीन-तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही, सभी पर आर्थिक दंड भी लगाया गया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि ट्रांसपोर्टर विनय कुमार सिन्हा, आशीष मैती, राज कुमार राय और रंजन प्रधान ने मिलीभगत कर इस घोटाले को अंजाम दिया। हालांकि, साक्ष्यों के अभाव में तीन तत्कालीन अधिकारियों—एस.के. दास, एस.एम. औरंगजेब और एन.सी. प्रसाद को बरी कर दिया गया। मामले के दो अन्य आरोपी मो. इशाक और बी.पी. गुप्ता की सुनवाई के दौरान ही मृत्यु हो चुकी है। सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक खुशबू जायसवाल ने अदालत में पक्ष रखा। अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए कुल 35 गवाहों की गवाही कराई और दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए।इस फैसले ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार की फाइलें चाहे कितनी भी पुरानी क्यों न हो जाएं, कानून के हाथ उन तक जरूर पहुँचते हैं।

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क्या था पूरा मामला?

यह मामला साल 1997 का है (RC-12(A)/1997-D), जो हल्दिया डिपो से बरही तक बिटुमेन की आपूर्ति से जुड़ा था। सीबीआई की जांच में यह परत-दर-परत खुला कि आपूर्ति के लिए जारी तीन आदेशों के तहत ट्रांसपोर्टर ने हल्दिया से माल तो उठाया, लेकिन उसे गंतव्य तक पूरा नहीं पहुँचाया। लगभग 154 मीट्रिक टन अलकतरा रास्ते में ही गायब कर दिया गया। इतना ही नहीं, ट्रांसपोर्टर ने बरौनी चेकपोस्ट पर बिना रिपोर्ट किए ही फर्जी भाड़ा बिल जमा कर सरकारी खजाने को चूना लगाया।

न्यायालय का फैसला

शुक्रवार को अदालत में सभी आरोपी उपस्थित थे। न्यायाधीश ने अपना फैसला सुनाते हुए निम्नलिखित निर्णय दिया:

  1. दोषी करार: मुख्य आरोपी ट्रांसपोर्टर विनय कुमार सिन्हा, आशीष मैती, राज कुमार राय और रंजन प्रधान को भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का दोषी पाया गया। सजा सुनाने के तुरंत बाद इनके खिलाफ ‘कन्विकशन वारंट’ जारी कर दिया गया।
  2. बरी: साक्ष्यों के अभाव में तत्कालीन विभागीय अधिकारियों— एस.के. दास, एस.एम. औरंगजेब और एन.सी. प्रसाद को अदालत ने बाइज्जत बरी कर दिया।
  3. मृत्यु: मुकदमे की लंबी प्रक्रिया के दौरान दो अन्य आरोपी मो. इशाक और बी.पी. गुप्ता की मृत्यु पहले ही हो चुकी है।
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