Ranchi News: झारखंड में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (हाई स्कूल शिक्षक) की नियुक्ति प्रक्रिया के तहत आरक्षित वर्ग के 3,704 पदों को सरेंडर किए जाने के राज्य सरकार के निर्णय के खिलाफ झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। लीला मुर्मू एवं अन्य अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन ने यह याचिका दायर की है, जिसमें सरकार के निर्णय को असंवैधानिक, मनमाना और विधि के विपरीत बताया गया है। याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2016 में जारी विज्ञापन के अंतर्गत आरक्षित श्रेणी के लिए बड़ी संख्या में योग्य और पात्र अभ्यर्थी उपलब्ध थे। इसके बावजूद बिना किसी ठोस कारण या वैधानिक आधार के 3,704 पदों को सरेंडर कर दिया गया। इससे हजारों ऐसे अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं, जो वर्षों से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई है कि पदों के सरेंडर से आरक्षित वर्ग के अधिकारों का हनन हुआ है। अधिवक्ता चंचल जैन ने सुप्रीम कोर्ट के सोनी कुमारी बनाम राज्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि नियुक्तियां विज्ञापित पदों की संख्या के भीतर ही की जानी चाहिए और योग्य अभ्यर्थियों की उपलब्धता के बावजूद पदों को समाप्त नहीं किया जा सकता। याचिका में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार का यह निर्णय न केवल संविधान के समानता और आरक्षण से जुड़े प्रावधानों का उल्लंघन करता है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के भी प्रतिकूल है। हाई कोर्ट से आग्रह किया गया है कि सरेंडर किए गए सभी 3,704 पदों को तत्काल प्रभाव से बहाल किया जाए और याचिकाकर्ताओं सहित सभी पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया जाए। मामला अब हाई कोर्ट में विचाराधीन है और हजारों अभ्यर्थियों की निगाहें अदालत के फैसले पर टिकी हैं।

