Ranchi News: झारखंड के बहुचर्चित फर्जी नक्सल सरेंडर मामले में झारखंड हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। झारखंड काउंसिल फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की पीठ ने कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट के आदेश के अनुरूप राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा सशरीर उपस्थित रहीं। अदालत ने नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि वर्ष 2021 में आदेश पारित होने के बावजूद राज्य पुलिस और सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि इतने संवेदनशील मामले को हल्के में लिया जा रहा है और निचले स्तर के अधिकारी से शपथ पत्र दायर कराना उचित नहीं है। इस पर डीजीपी ने कोर्ट से माफी मांगते हुए कहा कि गलती हुई है और विस्तृत जवाब दायर करने के लिए समय देने का आग्रह किया। अदालत ने समय देते हुए अगली सुनवाई की तारीख 15 दिसंबर निर्धारित की और चेतावनी दी कि भविष्य में किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 में दिग्दर्शन इंस्टीट्यूट के माध्यम से 514 छात्रों को नक्सली बताकर कथित तौर पर फर्जी तरीके से सरेंडर कराया गया था, जिस पर अब तक कार्रवाई लंबित है।