Supreme Court News

सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणीः कोविड से बचाने की बजाय आग से लोगों को मार रहे, जाने पूरा मामला

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 28 Aug, 2021
1 min read • 1.2k views
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Stay on arrest of Abhishek Jha, husband of suspended IAS Pooja Singhal, accused of money laundering
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुजरात सरकार (Gujarat Government) की उस अधिसूचना पर रोक लगा दी है, जिसमें कहा गया था कि जिन अस्पतालों के पास भवन उपयोग की अनुमति नहीं है, उन पर कार्यवाही नहीं की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि सरकार ने नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया।

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के अस्पतालों में आग की घटनाओं को लेकर राज्य सरकार पर गहरी नाराज़गी जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अस्पतालों में आग लगने की कई घटनाएं मानवीय त्रासदी हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति नहीं हो सकती है कि छोटी-छोटी इमारतों से अस्पताल चलने लगें और जहां नियमों का पालन ही न होता हो।

See also  Jharkhand High Court: सांसद-विधायक निजी वाहन पर नहीं लगा सकेंगे नेम प्लेट या बोर्ड, सरकार ने छूट ली वापस

आग की घटनाओं पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने कहा कि राज्यों को स्टेडियम या फिर दूसरे स्थानों में कोविड केयर सेंटर खोलने चाहिए। जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।

इसे भी पढ़ेंः छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसलाः पत्नी के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाना रेप नहीं

सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि हम लोगों को महामारी से बचाने के बजाय आग से लोगों को मार रहे हैं! बीयू की अनुमति से भी अगर 2 कमरे की जगह को अस्पताल में तब्दील किया जाता है, तो आपको अनुमति लेनी होगी। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि हम सब कुछ नहीं कर सकते लेकिन जो हमारी पहुंच में है, हमें करना चाहिए।

See also  बकरीद में छूट पर केरल को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, कहा- कोरोना के हालात के बीच आप लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं

उन्होंने टिप्पणी की कि योजना अधिकारियों के बीच एक माफिया लिंक है जिससे हमारे नागरिक पीड़ित हैं। हम इसकी अनुमति देते हैं तो, इसका मतलब यह होगा कि हम मिलीभगत से काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हम लगातार केवल डेवलपर्स और उल्लंघनकर्ताओं को कानून के प्रावधानों का पालन करने से छूट दे रहे हैं। हमारी पहली चिंता यह है कि यह अदालत उच्च न्यायालय के सुविचारित फैसले में दखल नहीं दे रही है। छूट और स्टे देकर हम ऐसा कर रहे हैं तो साजिश कर रहे हैं।

हम भारतीय समाज में सभी बीमारियों का इलाज नहीं कर सकते हैं, लेकिन हमें वह करना चाहिए जो हम एक न्यायाधीश के रूप में कानून के शासन को बनाए रखने के लिए कर सकते हैं। बेंच के दूसरे जज जस्टिस शाह ने कहा कि अस्पताल निवेश के अखाड़े बन गए हैं।

See also  Court News: चेक बाउंस मामले में बरी आरोपी दोषी करार, छह माह की सजा; ₹1.24 लाख मुआवजा देने का आदेश

उन्होंने कहा कि अगर ICMR की गाइडलाइन के तहत देखें तो ICU वाले 80 फीसदी अस्पताल बंद हो जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को कहा कि वो राजकोट के अस्पताल में आग से मरने वाले लोगों को मुआवजा देने पर विचार करे और अगली सुनवाई में इस पर जवाब दे।

Devesh Ananad

देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

2,377 articles published
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Devesh Ananad

Devesh Ananad

देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

Leave a Comment