Supreme Court News

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हिस्ट्रीशीटरों को जमानत देते समय आंखों पर पट्टी बांधने वाला नजरिया न अपनाएं अदालतें

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 25 Apr, 2021
1 min read • 1.2k views
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
supreme court of india
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि अदालतों को हिस्ट्रीशीटरों को जमानत देने के वक्त आंखों पर पट्टी बांधने वाला नजरिया नहीं अपनाना चाहिए। ऐसे लोगों को छोड़ने से पहले इस बात पर जरूर गौर करना चाहिए कि इसका गवाहों और पीड़ित के निर्दोष परिजनों पर क्या असर पड़ेगा। इसके साथ ही प्रधान न्यायाधीश (अब सेवानिवृत्त) एसए बोबडे इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के आरोपित को जमानत देने के आदेश को खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का कहना है कि आजादी जरूरी है, फिर चाहे एक व्यक्ति ने कोई अपराध ही क्यों न किया है। लेकिन अदालतों को भी यह देखने की जरूरत है उनकी रिहाई से किसके जीवन को खतरा है। क्या किसी गवाह या पीडि़त के जीवन को जमानत पर छोड़े जानेवाले अपराधी से खतरा है। यह बताने की जरूरत नहीं कि ऐसे मामलों में कोर्ट आंखों पर पट्टी बांधकर किसी आरोपित को इससे परे मान ले। इसके लिए अदालत केवल उन्हीं पक्ष की न सुनें जो उनके समक्ष पेश हुए हैं बल्कि अन्य पहलुओं का भी ध्यान रखें।

See also  Corona Update: सुप्रीम कोर्ट के 44 कर्मचारी कोरोना संक्रमित, अब घर से चलेगी अदालत

इसे भी पढ़ेंः Oxygen Shortage in Delhi: हाई कोर्ट ने कहा- प्राणवायु को बाधित करने वाले को हम लटका देंगे

बता दें कि याचिकाकर्ता सुधा सिंह आरोपी अरुण यादव के हाथों मारे गए राज नारायण सिंह की पत्नी हैं। 52 वर्षीय राज नारायण सिंह उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कोआपरेटिव सेल के अध्यक्ष थे। वर्ष 2015 में आजमगढ़ के बेलैसिया में चहलकदमी के दौरान गोली मारकर मार दिया गया था। आरोपी अरूण यादव एक शार्पशूटर है।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बीते दिनों मुख्तार अंसारी को पंजाब की रूपनगर जेल से उत्तर प्रदेश के बांदा की जेल भेजने का आदेश करते हुए कहा था कि कानून के राज को चुनौती मिलने पर हम असहाय दर्शक बने नहीं रह सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चाहे कैदी अभियुक्त हो, जो कानून का पालन नहीं करेगा वह एक जेल से दूसरी जेल भेजे जाने के निर्णय का विरोध नहीं कर सकता है।

See also  दाढ़ी काटने का मामला: योगी सरकार ने ट्विटर इंडिया के एमडी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिका
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Devesh Ananad

Devesh Ananad

देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

Leave a Comment