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बलात्कार पीड़िता ने जताई सजा काट रहे दोषी से ही शादी करने की इच्छा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- नहीं

Rape Victim: सुप्रीम कोर्ट ने केरल के कोट्टियूर में रहने वाली बलात्कार पीड़िता की उस याचिका को खारिज कर दिया है कि जिसमें उन्होंने उनके साथ दुष्कर्म करने वाले पूर्व पादरी से शादी करने की इजाजत मांगी थी।

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने केरल के कोट्टियूर में रहने वाली बलात्कार पीड़िता की उस याचिका को खारिज कर दिया है कि जिसमें उन्होंने उनके साथ दुष्कर्म करने वाले पूर्व पादरी से शादी करने की इजाजत मांगी थी। यह पूर्व पादरी 20 साल की कैद की सजा काट रहा है। अदालत ने पूर्व पादरी की अलग से दायर याचिका भी खारिज कर दी।

इस याचिका में उसने बलात्कार पीड़िता से शादी करने के लिए जमानत देने का आग्रह किया था। पीड़िता घटना के वक्त नाबालिग थी और उसने एक बच्चे को जन्म दिया है। जस्टिस विनीत सरन और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने पूर्व पादरी से कहा कि हाई कोर्ट ने सोच-समझकर फैसला दिया है और हम उसके निर्णय में दखल नहीं देना चाहेंगे।

पीठ ने पीड़िता से कहा कि वह पूर्व पादरी से शादी करने की अपनी याचिका को लेकर निचली अदालत जा सकती हैं। पूर्व पादरी के वकील अमित जॉर्ज ने कहा कि हाई कोर्ट ने इस मामले में शादी के संबंध में व्यापक निर्देश दिए हैं, जो एक मौलिक अधिकार है।

पीठ ने जॉर्ज से पूछा कि पीड़िता और पूर्व पादरी की क्या उम्र है? इस पर उन्होंने कहा कि पूर्व पादरी 49 वर्ष का है जबकि पीड़िता की उम्र 25 साल है। शीर्ष अदालत ने जॉर्ज से कहा कि आपने स्वयं हाई कोर्ट से व्यापक निर्देश मांगे हैं और वह हस्तक्षेप नहीं करना चाहेंगे।

इसे भी पढ़ेंः जज उत्तम आनंद हत्याकांडः सरकार ने हाई कोर्ट से कहा- दूसरे राज्यों से तार जुड़ने की संभावना, इसलिए सीबीआई जांच की अनुशंसा

सुप्रीम कोर्ट को मार्च महीने में इसी तरह के एक मामले में कुछ वकीलों की आलोचना झेलनी पड़ी थी जब तत्कालीन चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अगुवाई वाली एक बेंच ने बलात्कार के आरोपी से पूछ डाला कि क्या वह पीड़िता से शादी करने को तैयार है। मामला महाराष्ट्र इलेक्ट्रिक बोर्ड के एक सरकारी कर्मचारी से जुड़ा था।

तब कुछ वकीलों ने यह कहकर सुप्रीम कोर्ट बेंच की आलोचना की थी कि उसने आरोपी से ही उसकी इच्छा पूछी है जो गलत है। ध्यान रहे कि आरोपी ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी तब सीजेआई की बेंच ने उससे पूछा था, ‘क्या आप उससे (पीड़िता से) शादी करने को तैयार हैं?’।

कोर्ट ने कहा था कि अगर आरोपी शादी करने को तैयार होगा तो बेंच उसकी जमानत याचिका पर विचार कर सकती है। बेंच ने कहा कि नहीं तो आपको जेल जाना होगा और नौकरी गंवानी होगी। तब आरोपी के वकील ने बताया कि सरकारी कर्मचारी की शादी हो चुकी है, इसलिए वह पीड़िता से शादी नहीं कर सकता है। उसने कोर्ट को बताया कि आरोपी ने 2016 में लड़की से शादी करने को तैयार था, लेकिन तब लड़की 16 साल की थी और इस प्रस्ताव से मुकर गई थी।

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