Ranchi: चारा घोटाले के आरोपी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद को देवघर कोषागार से अवैध निकासी में मिली सजा बढ़ाने की सीबीआई की याचिका झारखंड हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है। बुधवार को जस्टिस आर मुखोपाध्याय और जस्टिस अंबुज नाथ की खंडपीठ ने याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। लालू प्रसाद को देवघर कोषागार से अवैध निकासी के मामले में रांची की सीबीआई कोर्ट ने छह जनवरी 2018 को साढ़े तीन साल की सजा सुनायी थी। जबकि इस मामले के एक अन्य आरोपी जगदीश शर्मा को साढ़े सात साल की सजा सुनायी थी। सीबीआई ने लालू प्रसाद की सजा बढ़ाने के लिए याचिका दायर की है।
सीबीआई की ओर से कोर्ट को बताया गया कि चारा घोटाले के एक मामले( आरसी64 ए/96) में लालू प्रसाद, बेक जूलियस, सुबीर भट्टाचार्य, आरके राणा, फूलचंद सिंह और महेश प्रसाद को साढ़े तीन तीन साल की सजा सुनायी गयी है, जबकि इस मामले के अन्य आरोपी जगदीश शर्मा को पीसी एक्ट और आईपीसी की धाराओं के तहत सात -सात साल की सजा सुनाई है। साथ ही 10-10 लाख रुपये का अर्थ दंड भी लगाया गया है। सीबीआई की ओर से बताया गया कि निचली अदालत ने अपने फैसले में यह लिखा है कि लालू प्रसाद के संरक्षण में चारा घोटाले को अंजाम दिया गया। निचली अदालत द्वारा लिखी गयी इस बात के मद्देनजर घोटाले को संरक्षण देने वाले को दी गयी सजा कम है। इसलिए इन अभियुक्तों को ज्यादा मिलनी चाहिए। इस मामले के आरोपी आरके राणा, फूलचंद सिंह और महेश प्रसाद की मौत होने के बाद हाईकोर्ट ने इन तीनों का नाम हटाते हुए लालू प्रसाद एवं अन्य आरोपियों की सजा बढ़ाने के मामले पर सुनवाई के लिए याचिका स्वीकार कर ली।
क्या है मामला
सीबीआई ने वर्ष 1996 में देवघर कोषागार से हुई 89 लाख की अवैध निकासी के मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। सीबीआई की जांच के बाद दायर आरोप पत्र के आलोक में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश की अदालत ने 23.12.2017 को फैसला सुनाते हुए सभी को दोषी करार दिया था और छह जनवरी 2018 को सजा सुनायी थी।

