high court news

Principal: प्लस टू स्कूलों में प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति पर हाईकोर्ट की रोक, मुख्य सचिव से पूछा- कब तक बनेगी नीति

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 09 Nov, 2021
1 min read • 1.2k views
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
jharkhand high court
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Ranchi: Principal झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) के जस्टिस डॉ एसएन पाठक की अदालत में प्लस टू स्कूलों में प्रभारी प्राचार्य बनाए जाने के आदेश के खिलाफ दाखिल कई याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य में हर विभाग में महत्वपूर्ण पद प्रभारी के भरोसे है। जबकि इन पदों पर स्थाई नियुक्ति की जानी चाहिए।

इसके बाद अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव से जवाब मांगा है। अदालत ने उनसे पूछा है कि कब तक प्लस टू स्कूलों में प्राचार्य की स्थाई नियुक्ति के लिए नियमावली बनाई जाएगी। इसकी स्पष्ट जानकारी शपथ पत्र के माध्यम से अदालत में दाखिल की जाए। तब तक प्लस टू स्कूलों में नए प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति पर रोक रहेगी।

See also  रांचीः 50 लाख कैश के साथ गिरफ्तार बजरंग ठाकुर को नहीं मिली जमानत, याचिका खारिज

इस मामले में अगली सुनवाई 29 नवंबर को सुनवाई होगी। इसको लेकर अनिता कुमारी व 15 अन्य की ओर से सरकार के आदेश के खिलाफ याचिका दाखिल की गई है। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता मनोज टंडन ने अदालत को बताया कि हाई स्कूल में एक नियमावली के तहत प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति की गई थी। लेकिन राज्य सरकार ने हाई स्कूल को अपग्रेड कर प्लस टू स्कूल बना दिया।

इसे भी पढ़ेंः Heavies Corpus: हाईकोर्ट के अधिवक्ता रजनीश वर्धन को बिना कारण बताए पटना पुलिस उठा ले गई, पत्नी ने दाखिल की हैवियस कॉर्पस याचिका

अपग्रेड होने के बाद सरकार ने प्लस टू के शिक्षकों को ही उस स्कूल का प्रभारी प्राचार्य बनाने का निर्णय लिया और एक आदेश जारी किया गया, जो कि बिल्कुल गलत है। अदालत को बताया गया कि जब नियमावली के तहत हाई स्कूल के शिक्षक को प्रभारी प्राचार्य बनाया गया था, तो उक्त नियमावली को किसी सरकारी आदेश से नहीं बदला जा सकता है। ऐसा करना असंवैधानिक है। इसलिए उक्त आदेश को निरस्त किया जाए।

See also  Liquer Scam: शराब घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल को मिली जमानत

अदालत को यह भी बताया गया कि सरकार के कई महत्वपूर्ण पद प्रभारी के भरोसे चल रहे हैं, जो कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है। इस पर अदालत ने कहा कि कई मामलों में सुनवाई के दौरान पता चला है कि लगभग हर विभाग में महत्वपूर्ण पद प्रभारी के भरोसे हैं। ऐसे में सरकार को इन पदों पर स्थाई नियुक्ति के लिए एक नीति बनानी चाहिए। इसके बाद अदालत ने मुख्य सचिव से इससे संबंधित नीति बनाने के बारे में जानकारी मांगी है।

Devesh Ananad

देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

2,377 articles published
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Devesh Ananad

Devesh Ananad

देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

Leave a Comment