Ranchi News: रांची स्थित विशेष एनआईए अदालत के विशेष न्यायाधीश अभिमन्यु कुमार की अदालत ने टेरर फंडिंग से जुड़े एक मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी (NIA) को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा धारा 294 CrPC के तहत दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें लातेहार सरकारी खजाने में जमा ₹3,00,100/- की मूल चालान पर्ची को सीधे साक्ष्य के रूप में दर्ज करने की गुहार लगाई गई थी। यह मामला विशेष एनआईए केस संख्या 01/2018 से जुड़ा है। पुलिस ने आरोपी चंदन कुमार के घर से उक्त राशि बरामद की थी, जिसे ‘टेरर प्रोसीड’ (आतंक की कमाई) माना गया था। इस राशि को 17 जनवरी 2017 को तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर राम दयाल राम (PW-7) ने सरकारी खजाने में जमा कराया था। एनआईए इस दस्तावेज को साबित करने के लिए उन्हें कोर्ट बुलाना चाहती थी, लेकिन मुख्य जांच अधिकारी ने अदालत को सूचित किया कि गवाह राम दयाल राम का 30 जून 2025 को निधन हो चुका है।
गवाह की मृत्यु के बाद एनआईए ने चालान को सीधे रिकॉर्ड पर लेने की अनुमति मांगी। हालांकि, बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि वे इस चालान की सत्यता को चुनौती देते हैं। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि धारा 294 CrPC के तहत किसी दस्तावेज को बिना औपचारिक गवाही के तभी स्वीकार किया जा सकता है, जब विपक्षी दल उसकी प्रामाणिकता पर आपत्ति न करे। चूंकि बचाव पक्ष इस पर विवाद खड़ा कर रहा है, इसलिए इसे सीधे प्रदर्श नहीं माना जा सकता। अदालत ने एनआईए को छूट दी है कि वे साक्ष्य अधिनियम के अन्य कानूनी प्रावधानों (जैसे बैंक या ट्रेजरी अधिकारियों की गवाही) के जरिए इस चालान को साबित कर सकते हैं।

