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JSSC New Rule: सरकार के जवाब नहीं दाखिल करने पर हाईकोर्ट नाराज, कहा- क्यों नहीं सारी नियुक्ति पर लगा दी जाए रोक

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 27 Jan, 2022
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Ranchi:JSSC New Rule झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की नियुक्ति परीक्षा की संशोधित नियमावली को चुनौती देने वाली याचिका की झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस डॉ. रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत ने इस बात को लेकर कड़ी नाराजगी जताई कि जब अदालत ने 21 दिसंबर 2021 तक सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था तो इस मामले में अब तक जवाब क्यों नहीं दाखिल किया गया।

अदालत ने माना कि इस तरह के नियम बनाने के पीछे सरकार की मंशा समझ में नहीं आ रही है कि आखिर आनारक्षित श्रेणी को राज्य से बाहर पढ़ने पर रोक क्यों लगाई गई है और आरक्षित श्रेणी को इससे छूट दी गई है। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि इस मामले में सरकार जवाब दाखिल करने की बजाय नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी कर दिया है, तो क्यों नहीं अदालत इन सारी नियुक्तियों पर रोक लगा दे।

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इस पर सरकार की ओर से अंतिम मौका दिए जाने का आग्रह किया गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। मामले में अगली सुनवाई आठ फरवरी को निर्धारित की है। सुनवाई के दौरान प्रार्थी की अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज ने अदालत को बताया कि कोर्ट ने एक दिसंबर को आदेश दिया था कि सरकार 21 दिसंबर 2021 से पहले इस मामले में अपना जवाब दाखिल कर दें। लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है।

इधर, सरकार इस मामले में कोई जवाब नहीं दे रही है और नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी कर रही है। अब तक कुल चार विज्ञापन जारी कर दिया गया है। ऐसे में नई नियमावली के चलते विज्ञापन में प्रार्थी आवेदन नहीं कर पा रहा है। इसपर अदालत की ओर से कहा गया कि राज्य में सिर्फ विज्ञापन निकालना और उसे रद्द करने का काम हो रहा है। अदालत इस तरह के कार्य को बर्दाश्त नहीं करेगी। सरकार की ओर से कहा गया कि दूसरे राज्यों की नियमावली को देखकर ही ऐसी नीति बनाई गई है। इस पर अदालत ने सरकार को ऐसी नियमावली बनाने के पीछे का तर्क सहित अपना जवाब कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है।

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इसको लेकर रमेश हांसदा और कुशल कुमार ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि राज्य के संस्थानों से दसवीं और प्लस टू योग्यता वाले अभ्यर्थियों को ही परीक्षा में शामिल होने की अनिवार्यता रखी गई है। इसके अलावा 14 स्थानीय भाषाओं में से ङ्क्षहदी और अंग्रेजी को बाहर कर दिया गया है। जबकि उर्दू, बांग्ला और उडिय़ा सहित 12 अन्य स्थानीय भाषाओं को रखा गया है।

नई नियमावली में राज्य के संस्थानों से ही दसवीं और प्लस टू की परीक्षा पास करने की अनिवार्य किया जाना संविधान की मूल भावना और समानता के अधिकार का उल्लंघन है। वैसे अभ्यर्थी जो राज्य के निवासी होते हुए भी राज्य के बाहर पढ़े हों, उन्हें नियुक्ति परीक्षा से नहीं रोका जा सकता है। नई नियमावली में संशोधन कर क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं की श्रेणी से ङ्क्षहदी और अंग्रेजी को बाहर कर दिया गया है, जबकि उर्दू, बांग्ला और उड़िया को रखा गया है।

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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