हाई कोर्ट ने कहा, अदालतों की सुरक्षा के लिए विशेष पुलिस बल की हो तैनाती

कैमरा वॉयस रिकॉर्डिंग के साथ- साथ एचडी क्वालिटी का होना चाहिए। इसके अलावा सिविल कोर्ट के कई दफ्तरों में भी सीसीटीवी कैमरा लगाना होगा, ताकि भ्रष्टाचार पर नजर रखी जा सके।

रांचीः झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य की अदालतों की सुरक्षा पर सरकार को तेजी से काम करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पिछले दिनों हाईकोर्ट के पास पत्थलगड़ी करने बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए थे।

कोर्ट परिसर में पहले भी कई हादसे हो चुके हैं इसलिए सरकार को गंभीरता दिखानी होगी। होमगार्ड के भरोसे अदालत की सुरत्रा नहीं हो सकती।  सरकार ने शपथपत्र में अब तक जो बातें कही है उसे पूरा कर जल्द लागू करना होगा।

अदालत ने सरकार को तीन सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।  सुनवाई के दौरान भवन निर्माण सचिव, गृह सचिव, सूचना एवं तकनीक सचिव हाजिर थे। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि सरकार ने अदालतों की सुरक्षा के लिए विशेष पुलिस बल गठन करने की बात कही थी।

लेकिन अभी तक इस पर क्या हुआ इसकी जानकारी नहीं दी जा रही है। यदि सरकार स्पेशल फोर्स नहीं बना सकती तो कोर्ट की सुरक्षा में लगाए जाने वाले पुलिसकर्मियों को खास प्रशिक्षण देना होगा।  
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि निचली अदालतों में बीएसएनएल की सेवा ली गयी है।

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लेकिन हमेशा लिंक खराब हो जाता है। इस कारण काफी परेशानी होती है। अदालत ने कहा कि सरकार तय करे कि किस निजी कंपनी की सेवा वहां लेकर व्यवस्था को ठीक किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि सीसीटीवी कैमरे अदालत परिसर के बाहरी तरफ लगाने के साथ- साथ कोर्ट रूम के अंदर भी लगाने होंगे।

कैमरा वॉयस रिकॉर्डिंग के साथ- साथ एचडी क्वालिटी का होना चाहिए। इसके अलावा सिविल कोर्ट के कई दफ्तरों में भी सीसीटीवी कैमरा लगाना होगा, ताकि भ्रष्टाचार पर नजर रखी जा सके। अदालत ने राज्य की निचली अदालतों के सभी दस्तावेज को डिजिटाइज करने का निर्देश भी सरकार को दिया।

कोर्ट ने कहा कि दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए डिजिटाइजेशन जरूरी है और सरकार को इस पर भी काम करना होगा। अदालत ने सरकार के अधिकारियों से कहा कि नए हाईकोर्ट परिसर की सुरक्षा का भी पुख्ता इंतजाम करना होगा। वहां भी ऐसी व्यवस्था करनी होगी कि भविष्य में पेपरलेस कोर्ट हो सके।

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