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Hospital: हाईकोर्ट ने कहा- रांची सदर अस्पताल का जल्द काम हो पूरा, संवेदक बताएं कितना काम बाकी

Ranchi: Hospital झारखंड हाईकोर्ट रांची सदर अस्पताल का जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई को संवेदक की ओर से किए कार्यों की अद्यतन जानकारी कोर्ट में पेश की जाए। इस मामले में 23 दिसंबर को सुनवाई होगी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि कोर्ट के आदेश पर संवेदक और राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। जिसमें सभी काम में सहयोग करने की बात कही गई। संवेदक ने भी जल्द से जल्द काम पूरा करने का आश्वासन दिया है।

अदालत ने कहा कि संवेदक ने कई बार पूरा करने का समय दिया लेकिन अभी तक काम पूरा नहीं हो पाया है। इस दौरान संवेदक की ओर से कहा गया कि अस्पताल में कई ऐसे उपकरण लगाए गए हैं, जिसके लिए 33 केवीए के ट्रांसफार्मर लगाने की जरूरत है, लेकिन अभी तक ट्रांसफार्मर नहीं लगा है। सरकार की ओर से कहा गया कि इससे पहले इन्होंने ऐसी कोई मांग नहीं की थी। बैठक में इस पर सहमति बनी है एक सप्ताह में सदर अस्पताल में ट्रांसफार्मर लगा दिया जाएगा।

इसे भी पढ़ेंः Regularization: हाईकोर्ट ने कहा- संविदा पर काम करने वालों को नियमित करने पर निर्णय लें सरकार

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को सिर्फ 54 करोड़ देगी सरकार
झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डा रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत में नेशनल लॉ विश्वविद्यालय को फंड दिए जाने के मामले में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात को लेकर कड़ी नाराजगी जताई कि राज्य सरकार ने शपथ पत्र में कहा था कि 70 करोड़ रुपये दिए जाएंगे, लेकिन अभी कहा जा रहा है कि एकमुश्त सिर्फ 54 करोड़ रुपये ही दिए जाएंगे। जबकि अदालत राज्य सरकार के इस तरह के बयान को पहले ही खारिज कर चुकी है।

ऐसा लगता है कि अब नेशनल लॉ विश्वविद्यालय को बंद करना पडेगा। इस दौरान अदालत ने बीसीआइ से पूछा कि वह किस प्रकार से नेशनल लॉ विश्वविद्यालय को आर्थिक मदद करेगा। इस पर बीसीआइ के अधिवक्ता ने कहा कि संस्थान विश्वविद्यालय को किसी प्रकार से आर्थिक मदद नहीं कर पाएगा। क्योंकि बीसीआइ में ऐसा कोई प्रविधान नहीं है। अदालत ने कहा कि विश्वविद्यालय का स्टैच्यूट में ऐसा है कि बीसीआइ भी इसको चलाने में आर्थिक मदद करेगी, लेकिन आपकी ओर से कोई मदद नहीं दी जा रही है।

इस पर बीसीआइ के अधिवक्ता ने कहा कि यह विधान उन पर अनिवार्य रूप से लागू नहीं होता है। इसपर अदालत ने कहा कि अगर बीसीआइ पर यह विधान लागू नहीं होता है तो राज्य सरकार पर फिर कैसे लागू होगा। अदालत ने कहा कि अब उन्हें ही इस मामले में कुछ आदेश पारित करना होगा। फिलहाल अदालत ने बाद में आदेश पारित करने की बात कहते हुए सुनवाई स्थगित कर दी।

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