Ranchi News : झारखंड हाई कोर्ट ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड (सीयूजे) पर गंभीर टिप्पणी करते हुए यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को गुरुवार सुबह 10.30 बजे अदालत में व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का निर्देश दिया है। जस्टिस राजेश कुमार की अदालत ने पीएचडी प्रवेश से जुड़े मामले में विश्वविद्यालय द्वारा दाखिल शपथ पत्र को प्रथम दृष्टया झूठा और भ्रामक करार दिया है। याचिकाकर्ता अमित कुमार चौबे ने इंटरनेशनल रिलेशंस विभाग में वर्ष 2023-24 सत्र की पीएचडी प्रवेश नीति को चुनौती दी है। यूनिवर्सिटी ने 22 अगस्त 2025 को दाखिल पूरक शपथ पत्र में दावा किया था कि उक्त सत्र में तीन ओबीसी सीटें खाली थीं, जिन्हें सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को नहीं दिया जा सकता था और इन्हें अगले सत्र के लिए कैरी फॉरवर्ड कर दिया गया।
वहीं याचिकाकर्ता ने 13 नवंबर 2025 के शपथ पत्र में इसका खंडन करते हुए सीट मैट्रिक्स पेश किया, जिसमें कुल 6 सीटों का उल्लेख था—एससी-1, एसटी-0, ओबीसी-4, ईडब्ल्यूएस-0 और यूआर-1। अदालत ने इस विरोधाभास को गंभीर मानते हुए विश्वविद्यालय के जवाब को भ्रामक बताया। याचिकाकर्ता का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों के अनुसार, शैक्षणिक संस्थानों में सीटें खाली नहीं रखी जा सकतीं और योग्य उम्मीदवारों से उन्हें भरना अनिवार्य है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया पाया कि शपथ पत्र के माध्यम से अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया गया है और इसी कारण रजिस्ट्रार को व्यक्तिगत रूप से स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है।

