Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने रांची के नामकुम अंचल क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री और राजस्व दस्तावेजों में हुई कथित हेरफेर के मामले की जांच तेज कर दी है। एसीबी ने शुक्रवार को हाईकोर्ट को सूचित किया कि नामकुम अंचल के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्रारंभिक जांच (PE – Preliminary Enquiry) पूरी कर ली गई है और अब औपचारिक रूप से पीई दर्ज करने के लिए सक्षम प्राधिकार से अनुमति मांगी गई है। इस जानकारी पर जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने एसीबी को पीई से संबंधित एक विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है।
गायब दस्तावेजों और म्यूटेशन में हेरफेर का मामला
यह पूरा मामला प्रार्थी थॉमस साइमन साइरिल हंस द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। विवादित भूमि नामकुम अंचल के डुंडु क्षेत्र में स्थित है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि नामकुम अंचल कार्यालय में एक दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के प्रकरण में भारी गड़बड़ी की गई है और जांच के लिए मांगने पर भी मूल राजस्व अभिलेख (ओरिजिनल रिकॉर्ड) उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।
इससे पहले की सुनवाई में यह बात सामने आई थी कि अंचल कार्यालय दूसरे पक्षकार के पक्ष में किए गए म्यूटेशन की सर्टिफाइड कॉपी (प्रमाणित प्रति) देने में लगातार टालमटोल कर रहा था। इस संबंध में हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में प्रार्थी के पक्ष में स्पष्ट आदेश दिए जाने के बावजूद अंचल अधिकारियों ने उसका अनुपालन नहीं किया था।
“रिकॉर्ड का गायब होना सामान्य नहीं”— हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी
जब हाईकोर्ट ने इस टालमटोल को लेकर राज्य सरकार से कड़ा जवाब तलब किया, तो सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि म्यूटेशन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज अंचल कार्यालय से गायब हो चुके हैं। इस दलील पर कोर्ट ने बेहद कड़ी और तल्ख टिप्पणी की थी।
अदालत ने कहा था कि:
“किसी सरकारी कार्यालय से भूमि संबंधी महत्वपूर्ण और संवेदनशील रिकॉर्ड का इस तरह गायब हो जाना कोई सामान्य बात नहीं मानी जा सकती। यह सीधे तौर पर गंभीर लापरवाही या फिर किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है।”
प्रथम दृष्टया सरकारी रिकॉर्ड में की गई इस अनियमितता को अत्यंत गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी एसीबी को पूरे प्रकरण की गहराई से पड़ताल करने का जिम्मा सौंपा था, जिसपर अब कार्रवाई आगे बढ़ रही है।

