Ranchi News: झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने 24 साल पुराने पोटका सड़क दुर्घटना मामले (Cr. Revision No. 675/2017) में सुनवाई करते हुए आरोपी टैंकर चालक अनिल सिंह उर्फ अनिल कुमार सिंह (निवासी- इटखोरी, चतरा) की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने जमशेदपुर की अदालत द्वारा दी गई 2 वर्ष के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने जमानत पर बाहर चल रहे याचिकाकर्ता का बेल बॉन्ड रद्द करते हुए उसे दो महीने के भीतर निचली अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया है। सरेंडर न करने पर कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
मामले की पृष्ठभूमि:
घटना: 5 नवंबर 2002 को जमशेदपुर के पोटका थाना क्षेत्र (कांड संख्या 74/2002) में लापरवाही से आ रहे टैंकर (BR-2H-4057) ने सामने से आ रही मारुति वैन (WE-02C-2692) में जोरदार टक्कर मार दी थी।
जान-माल का नुकसान: इस भीषण दुर्घटना में मारुति वैन में सवार रामेश्वर मुखी, टुकलू मुखी (चालक), रीना मुखी और मनीषा शांडिल समेत 6 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि आधा दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
निचली अदालत का फैसला: जमशेदपुर के न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने 19 अक्टूबर 2012 को आरोपी चालक को भादंवि (IPC) की धारा 279, 337 और 304-A के तहत दोषी ठहराते हुए अधिकतम 2 साल की सजा और कुल 6,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ दायर अपील को अपर सत्र न्यायाधीश-IV, जमशेदपुर ने 6 फरवरी 2017 को खारिज कर दिया था।
हाईकोर्ट की टिप्पणी:
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रदीप कुमार देवमणि ने तर्क दिया कि चालक दुर्घटना स्थल से गिरफ्तार नहीं हुआ था और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सही से साबित नहीं हुई। वहीं राज्य सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक विशंभर शास्त्री ने सजा को सही ठहराया।
अदालत ने गवाहों और घायलों के बयानों का अवलोकन करने के बाद पाया कि दुर्घटना टैंकर चालक की तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण ही हुई थी, जिसमें कई निर्दोष लोगों की जान गई। कोर्ट ने निचली अदालत और अपीलीय अदालत के फैसले को न्यायसंगत मानते हुए हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

