Ranchi News: झारखंड हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रांची के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शिव प्रताप वर्मा की सेवा से बर्खास्तगी के आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने प्रार्थी को ‘व्हिसलब्लोअर’ (भ्रष्टाचार उजागर करने वाले) के रूप में कानूनी संरक्षण प्रदान किया है। कोर्ट ने संस्थान के इस कदम को प्रतिशोधात्मक और पक्षपातपूर्ण माना है।
क्या है पूरा मामला: भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद गिरी थी गाज
शिव प्रताप वर्मा ने अक्टूबर 2022 में केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) में एक गोपनीय शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में उन्होंने आईआईएम रांची की भर्ती प्रक्रिया और नए भवन निर्माण में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। हालांकि, जांच के दौरान उनकी पहचान उजागर हो गई, जिसके बाद मार्च 2023 में उन्हें अचानक पद से मुक्त कर दिया गया। इसके बाद फरवरी 2024 में उन पर झूठी जानकारी देने और सोशल मीडिया पर आंतरिक जानकारी लीक करने जैसे कई आरोप लगाते हुए चार्जशीट जारी कर दी गई थी।
सीवीसी से मिला था संरक्षण, फिर भी कर दिया गया बर्खास्त
मामले की गंभीरता को देखते हुए जून 2024 में केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) ने शिव प्रताप वर्मा को आधिकारिक तौर पर व्हिसलब्लोअर संरक्षण प्रदान किया था। इसके बावजूद संस्थान ने विभागीय जांच जारी रखी और अगस्त 2024 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया। इसके खिलाफ की गई उनकी अपील को भी जनवरी 2025 में खारिज कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने न्याय के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: “व्हिसलब्लोअर के मामले में संस्थान निष्पक्ष नहीं हो सकता”
हाई कोर्ट ने अपने 13 पन्नों के विस्तृत फैसले में व्हिसलब्लोअर की गोपनीयता और सुरक्षा के महत्व पर विशेष जोर दिया। अदालत ने कहा:
“जब कोई कर्मचारी संस्थान के भीतर के भ्रष्टाचार को उजागर करता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने वाला आंतरिक प्राधिकारी कभी निष्पक्ष नहीं रह सकता। प्रार्थी के खिलाफ अपनाई गई प्रक्रिया पूरी तरह दुर्भावना से प्रेरित और नियमों के खिलाफ थी।”
अदालत का आदेश: तुरंत बहाल करें, लेकिन गड़बड़ी की जांच स्वतंत्र एजेंसी से हो
हाई कोर्ट ने 9 अगस्त 2024 के बर्खास्तगी आदेश और 18 जनवरी 2025 के अपीलीय आदेश को अवैध पाते हुए खारिज कर दिया है और शिव प्रताप वर्मा को तुरंत सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि व्हिसलब्लोअर होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि कर्मचारी को सभी नियमों की अवहेलना करने की छूट मिल जाए। अदालत ने आदेश दिया है कि यदि अधिकारी ने कोई कदाचार या नियमों का उल्लंघन किया है, तो उसकी जांच आईआईएम प्रशासन के बजाय किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष निकाय द्वारा कराई जानी चाहिए।