Ranchi News: लातेहार पुलिस द्वारा एक युवक को घर से उठाए जाने और तीन महीने बाद भी उसका सुराग न मिलने पर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। गुरुवार को जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने हेबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने दो टूक कहा कि पुलिस का रवैया बेहद सुस्त है और यदि इसमें सुधार नहीं हुआ, तो कोर्ट हेबियस कॉर्पस के सभी मामलों की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपने पर विचार करेगा। लापता युवक दिलीप कुमार के पिता का आरोप है कि 15 जनवरी 2026 की रात करीब दो बजे लातेहार पुलिस उनके बेटे को घर से उठाकर ले गई थी। अगले दिन थाना पहुंचने पर उन्हें भगा दिया गया और एसपी से शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
लातेहार पुलिस का जवाब असंतोषजनक
अदालत ने लातेहार पुलिस द्वारा दाखिल किए गए जवाब को खारिज करते हुए इसे असंतोषजनक बताया। सुनवाई के दौरान पुलिस ने दावा किया कि लापता युवक दिलीप कुमार का संबंध नक्सली संगठन से है। इस पर अदालत ने नया शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने बोकारो के एक पुराने मामले का हवाला देते हुए याद दिलाया कि कैसे पुलिस की सुस्ती के कारण 2020 में गायब हुई युवती की हत्या कर दी गई थी, जिसका पता कोर्ट की सख्ती के बाद 2021 में चला।
धोखे से हस्ताक्षर कराने का आरोप:
याचिका में कहा गया है कि पुलिस ने बाद में पिता को बुलाकर सादे कागज पर हस्ताक्षर करा लिए और एक फर्जी प्राथमिकी (FIR) तैयार कर दी। इस फर्जी एफआईआर में दिखाया गया कि कुछ अज्ञात लोग दिलीप को उठा ले गए हैं। आरोप है कि पुलिस ने दिलीप के छोटे भाई के भी फर्जी हस्ताक्षर किए और इसी आधार पर सीजेएम कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल कर शिकायतवाद को समाप्त करवा दिया।