Ranchi HC News: हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में हिरासत में रखी गई महिला से दुष्कर्म के मामले में तीन कांस्टेबलों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। तीनों पुलिसकर्मियों को निलंबित भी कर दिया गया है। राज्य सरकार ने सोमवार को हाईकोर्ट को यह जानकारी दी।
सरकार की ओक से इसका शपथपत्र भी दाखिल किया गया। कोर्ट में डालसा की ओर से अदालत में पेश की गई सीलबंद रिपोर्ट में भी महिला के साथ तीन पुलिसकर्मियों द्वारा दुष्कर्म किए जाने का उल्लेख किया गया है।
अदालत ने महिला को डिटेंशन सेंटर में रहने के दौरान आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी। अदालत ने प्रार्थी को राज्य सरकार की ओर से दाखिल जवाब पर प्रतिउत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि महिला को बांग्लादेश भेजने के लिए वर्ष 2023 से ही विदेश मंत्रालय को पत्र लिखे जा रहे हैं।
हालांकि, अब तक केंद्र सरकार की ओर से कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। इस पर अदालत ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता से इस बिंदु पर जवाब दाखिल करने को कहा।
सरकार ने यह भी बताया कि महिला से दुष्कर्म के आरोप में तीन कांस्टेबलों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें निलंबित कर दिया गया है। अदालत ने प्राथमिकी में लगाई गई धाराओं को लेकर भी सवाल उठाया। इस पर महाधिवक्ता ने अदालत को आश्वस्त किया कि प्राथमिकी में आवश्यक संशोधन किया जाएगा।
2021 में तीन साल की सजा, फिर भी डिटेंशन सेंटर में क्यों
सुनवाई में अदालत ने महिला को लंबे समय तक हिरासत में रखे जाने को लेकर सरकार से कई सवाल किए। अदालत ने मौखिक रूप से पूछा कि यदि महिला को वर्ष 2021 में विदेशी अधिनियम के मामले में दोषी ठहराकर तीन साल की सजा दी गई थी, तो सजा पूरी होने के बाद उसे बांग्लादेश क्यों नहीं भेजा गया। उसे डिटेंशन सेंटर में रखने की जरूरत क्यों पड़ी।
अदालत ने यह भी सवाल किया कि वर्ष 2025 में महिला के खिलाफ विदेशी अधिनियम के तहत दोबारा मामला दर्ज किया गया, जबकि वर्ष 2026 में वह उस मामले में बरी हो चुकी है। बरी किए जाने के आदेश के खिलाफ सरकार ने अपील क्यों नहीं की।
बांग्लादेश सरकार से संपर्क का दावा
अदालत के सवालों पर सुनवाई में मौजूद गृह सचिव ने बताया कि महिला को बांग्लादेश भेजने के लिए सरकार की ओर से बांग्लादेश सरकार से संपर्क किया गया था, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला।
2018 में दर्ज हुए थे दो मामले
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि महिला के खिलाफ वर्ष 2018 में दो मामले दर्ज किए गए थे। इनमें एक बच्चे के अपहरण से संबंधित और दूसरा विदेशी अधिनियम से जुड़ा मामला था।
बच्चे के अपहरण से संबंधित मामले में महिला को दो साल की सजा हुई थी, जबकि वर्ष 2021 में विदेशी अधिनियम के मामले में उसे तीन साल की सजा सुनाई गई थी। सजा के बाद महिला को हजारीबाग डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया था।
वह वर्ष 2025 के अंत में डिटेंशन सेंटर से भाग गई थी। इसके बाद उसके खिलाफ विदेशी अधिनियम के तहत एक और मामला दर्ज किया गया, जिसमें वर्ष 2026 में उसे बरी कर दिया गया।

