Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) द्वारा भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक पुराने मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत (ट्रिब्यूनल) के 29 सितंबर 2018 के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें मूल दावेदार की संदर्भ याचिका (Reference Case) को खारिज कर दिया गया था। साथ ही, अदालत ने मामले को ट्रिब्यूनल में वापस बहाल (Restore) करते हुए नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया है।
क्या था पूरा मामला और हाईकोर्ट की मुख्य बातें:
भूमि अधिग्रहण: रामगढ़ के सेवाई मौजा स्थित खाता संख्या 83 के तहत कुल 18.19 एकड़ जमीन (प्लॉट संख्या 656, 1134 और 1216) को सीसीएल द्वारा ‘राजप्पा प्रोजेक्ट’ के विकास और कोयला खनन के लिए 29 दिसंबर 1962 की अधिसूचना (धारा 4) के तहत अधिग्रहित किया गया था।
दावेदार की मौत और उत्तराधिकारी: मूल दावेदार/अपीलार्थी ने मुआवजे के लिए ट्रिब्यूनल में आवेदन किया था, जिनकी मृत्यु के पश्चात उनके कानूनी उत्तराधिकारियों (पत्नी और बच्चों) को मामले में प्रतिस्थापित (Substitute) किया गया।
निचली अदालत का फैसला व कमी: निचली अदालत ने केवल इस आधार पर दावा खारिज कर दिया था कि ‘फॉर्म-क’ (Form-K) रिटर्न दाखिल नहीं किया गया था। जबकि इसी खाता-प्लॉट से जुड़े अन्य दावेदारों (जैसे शकुंतला देवी व अन्य) के मामलों को ट्रिब्यूनल ने स्वीकार कर लिया था और उन्हें मुआवजा मिल चुका था।
अतिरिक्त साक्ष्य स्वीकार: हाईकोर्ट ने अपीलार्थियों द्वारा Order XLI Rule 27 CPC के तहत दायर याचिका को स्वीकार करते हुए नए दस्तावेजों (जैसे पर्चा और अन्य रिकॉर्ड) को अतिरिक्त साक्ष्य के रूप में रिकॉर्ड पर ले लिया।
नौकरी का आधार: अदालत ने यह भी माना कि मूल दावेदार को सीसीएल द्वारा भूमि अधिग्रहण नीति के तहत रोजगार (Category-I Mazdoor) प्रदान किया गया था, जो इस बात की पुष्टि करता है कि उनकी जमीन वास्तव में अधिग्रहित की गई थी।
अदालत का निर्देश:
हाईकोर्ट ने निचली अदालत (अपर न्यायिक आयुक्त प्रथम सह ट्रिब्यूनल, रांची) के पुराने फैसले को खारिज करते हुए मामले को वापस भेज दिया है। चूंकि मामला काफी पुराना है, इसलिए अदालत ने दोनों पक्षों (अपीलार्थी और सीसीएल) को 29 सितंबर 2026 को सुबह 10:30 बजे संबंधित ट्रिब्यूनल के समक्ष अनिवार्य रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है, ताकि बिना अनावश्यक स्थगन (Adjournment) के मामले का जल्द से जल्द निपटारा किया जा सके।

