Civil Court News

Court News: बोकारो कोषागार से 4.29 करोड़ का गबन: मुख्य आरोपी की पत्नी अन्नू पांडेय को बड़ा झटका, कोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत

CourtNews Desk
By CourtNews Desk On 01 Jul, 2026
1 min read • 1.2k views
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Court News: बोकारो कोषागार से 4.29 करोड़ का गबन: मुख्य आरोपी की पत्नी अन्नू पांडेय को बड़ा झटका, कोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

अदालत की सख्त टिप्पणी- “2 साल तक खाते में आते रहे करोड़ों रुपये, गृहिणी बताकर अनभिज्ञता जताना गले उतरने वाली बात नहीं”

Ranchi News: बोकारो कोषागार (Treasury) से 4.29 करोड़ रुपये के वीआईपी वेतन घोटाले और गबन मामले में मुख्य आरोपी कौशल कुमार पांडेय की पत्नी अन्नू पांडेय को अदालत से बड़ा झटका लगा है। सीआईडी (CID) के विशेष न्यायाधीश कुलदीप की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अन्नू पांडेय की अग्रिम जमानत याचिका (Anticipatory Bail Plea) को सिरे से खारिज कर दिया है। यह मामला राज्य के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक के रूप में सामने आ रहा है।

क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ गबन?

यह पूरा मामला सीआईडी थाना कांड संख्या से जुड़ा है। सरकारी धन के इस गबन की कार्यप्रणाली बेहद चौंकाने वाली है:

  • फर्जी वेतन से निकासी: प्राथमिकी (FIR) के अनुसार, बोकारो एसपी कार्यालय में लेखाकार (Accountant) के पद पर कार्यरत कौशल कुमार पांडेय ने एक सोची-समझी साजिश रची। उसने पुलिस अवर निरीक्षक (Sub-Inspector) उपेंद्र सिंह के नाम पर मई 2024 से लेकर मार्च 2026 तक लगातार वेतन मद से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी की।
  • पत्नी के खाते का इस्तेमाल: जांच में यह बात सामने आई कि सरकारी खजाने से निकाली गई यह भारी-भरकम राशि सबसे पहले मुख्य आरोपी की पत्नी अन्नू पांडेय के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती थी।
  • अकाउंट्स का खेल: अन्नू पांडेय के खाते में राशि आने के बाद, उस रकम का अधिकांश हिस्सा उनके पति कौशल कुमार पांडेय के निजी बैंक खाते में स्थानांतरित (Transfer) कर दिया जाता था।
See also  JHALSA News: झालसा की अनूठी पहल: 21 जून को वर्चुअल माध्यम से एक साथ योग करेंगे झारखंड के 25 हजार कैदी और बुजुर्ग

“मैं सिर्फ एक गृहिणी हूँ…” — याचिकाकर्ता की दलील

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अन्नू पांडेय की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि वह एक साधारण गृहिणी (Housewife) हैं। उनका इस अपराध से कोई लेना-देना नहीं है और उनके पति द्वारा की जा रही कथित जालसाजी या इस बैंकिंग लेन-देन के बारे में उन्हें कोई भी जानकारी नहीं थी। उनके खाते का इस्तेमाल उनके पति ही कर रहे थे।

कोर्ट ने क्यों खारिज की जमानत? न्यायधीश की तीखी टिप्पणी

सीआईडी के विशेष न्यायाधीश कुलदीप की अदालत ने याचिकाकर्ता की ‘मासूमियत’ और ‘अनभिज्ञता’ वाली दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका नामंजूर करते हुए कहा:

“लगभग दो वर्षों की लंबी अवधि तक किसी के बैंक खाते में लगातार करोड़ों रुपये का आना-जाना (ट्रांजैक्शन) होता रहे और खाताधारक यह कहे कि वह इससे पूरी तरह अनभिज्ञ है, यह सामान्य मानवीय व्यवहार और वर्तमान बैंकिंग व्यवस्था के नियमों के बिल्कुल विपरीत है।”

अदालत ने अपने आदेश में साफ किया कि यह एक गंभीर आर्थिक अपराध (Economic Offence) है, जिसमें जनता की गाढ़ी कमाई और सरकारी धन की एक बहुत बड़ी राशि (4.29 करोड़ रुपये) का गबन किया गया है। चूंकि मामले की जांच अभी बेहद संवेदनशील मोड़ पर है और सीआईडी इसमें लगातार कड़ियों को जोड़ रही है, इसलिए ऐसे बड़े वित्तीय घोटाले के आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

CourtNews Desk

1,849 articles published
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
CourtNews Desk

CourtNews Desk

Bringing you the latest news and in-depth analysis from around the world.

Leave a Comment