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दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी- पीड़िता से शादी करने से खत्म नहीं हो जाता दुष्कर्म का आरोप

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 02 Aug, 2021
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New Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि दुष्कर्म पीड़िता से शादी कर लेने से आरोपी पर लगा दुष्कर्म का आरोप समाप्त नहीं हो जाता है। दुष्कर्म एक गंभीर अपराध है और दोनों पक्षों के बीच समझौता हो जाने के आधार पर इसे निरस्त नहीं किया जा सकता है।

जस्टिस मुक्ता गुप्ता की पीठ ने उक्त टिप्पणी करते हुए याचिकाकर्ता के खिलाफ दुष्कर्म की धारा में दर्ज प्राथमिकी को निरस्त करने से इन्कार कर दिया। युवती ने आरोप लगाया था कि याचिकाकर्ता ने एक होटल में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।

युवती ने कहा कि शादी करने की स्थिति में ही उसने आरोपी के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। हालांकि, बाद में उसने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया था। एफआइआर रद करने की मांग को लेकर याचिका दायर कर आरोपी ने दलील दी कि उन दोनों के बीच समझौता हो गया है और उन्होंने शादी कर ली है, इसलिए इस मामले में दर्ज प्राथमिकी को निरस्त कर दिया जाए।

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इससे पहले दुष्कर्म पीड़िता युवती और आरोपी की दलील के बाद एक मामले में सुप्रीम कोर्ट में 2013 में दर्ज कराई गई एक एफआइआर को खत्म करने का फैसला सुनाया था। दरअसल, दोनों पक्षों का कहना है कि कुछ गलतफहमी के कारण एफआइआर दर्ज करा दी गई थी।

यह दुष्कर्म का मामला 2013 का था और दोनों ने 2014 में शादी कर ली थी और तब से एक-दूसरे के साथ खुश हैं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अब दोनों पक्ष अच्छी शादीशुदा जिंदगी बिता रहे हैं। ऐसे में एफआइआर का कोई अस्तित्व नहीं रह जाता है।

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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में आए इस मामले के मुताबिक, पीड़िता युवती ने सितंबर, 2013 में एफआइआर दर्ज कराई थी। इसके एक साल के भीतर ही अक्टूबर, 2014 में पीड़िता और आरोपी युवक ने शादी कर ली थी। उसके बाद से दोनों पक्ष सफदरजंग एन्क्लेव पुलिस थाने में दर्ज एफआइआर खत्म कराने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने एफआइआर रद करने से इन्कार कर दिया था।

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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