Ranchi news: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के काफिले को रोकने के पांच साल पुराने बहुचर्चित मामले में हिंदुत्ववादी नेता भैरव सिंह को अदालत से बड़ी राहत मिली है। अपर न्यायायुक्त अखिलेश कुमार तिवारी की अदालत ने साक्ष्य के अभाव में उन्हें बरी कर दिया। यह मामला 4 जनवरी 2021 को किशोरगंज चौक पर मुख्यमंत्री के काफिले को रोके जाने और हंगामे से जुड़ा था। घटना के बाद सुखदेव नगर थाना में भैरव सिंह समेत अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले में भैरव सिंह ने 7 जनवरी 2021 को अदालत में आत्मसमर्पण किया था। अभियोजन के अनुसार, 4 जनवरी 2021 की शाम ओरमांझी में एक युवती की नृशंस हत्या के विरोध में लोग प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान किशोरगंज चौक से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का काफिला गुजर रहा था, जिसे प्रदर्शनकारियों ने रोककर विरोध प्रदर्शन किया था।
दरअसल, 3 जनवरी 2021 को ओरमांझी के जंगल से एक युवती का सिरकटा शव बरामद हुआ था। शव की पहचान और हत्यारों तक पहुंचना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था। इस जघन्य हत्याकांड को लेकर लोगों में भारी आक्रोश था। घटना के नौ दिन बाद युवती का सिर घटनास्थल से करीब 12 किलोमीटर दूर चंदवे गांव से बरामद हुआ, जिसके बाद उसकी पहचान सूफिया परवीन के रूप में हुई। जांच के दौरान पुलिस ने सूफिया परवीन के पहले पति शेख बेलाल और उसकी दूसरी पत्नी अफसाना खातून को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बाद में अदालत ने दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं मुख्यमंत्री के काफिले को रोकने के मामले में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर अदालत ने भैरव सिंह को बरी कर दिया।

