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Ranchi: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एमवाई इकबाल के जीवन और विरासत के उपलक्ष्य में सेमिनार का किया गया आयोजन

CourtNews Desk
By CourtNews Desk On 15 Feb, 2025
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Ranchi: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एमवाई इकबाल के जीवन और विरासत के उपलक्ष्य में सेमिनार का किया गया आयोजन
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Ranchi: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एमवाई इकबाल के जीवन और विरासत के उपलक्ष्य में सेमिनार का किया गया आयोजन

Ranchi: संत जेवियर्स कॉलेज के ऑडिटोरियम में इंडियन एसोसिएशन ऑफ लायर्स, झारखंड के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय के पुर्व न्यायाधीश जस्टिस एम वाई एकबाल के जीवन और विरासत के उपलक्ष्य में एक सेमिनार का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत अफाक रशीदी तथा सुभाशीष रसिक सोरेन के द्वारा किया गया। कार्यक्रम में आए हुए अतिथियों का बुके देकर स्वागत किया गया और कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई।दीपा प्रज्वलन के बाद संविधान के पाठ को पढ़ा गया ।उसके बाद शुरुआती भाषण फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजुर प्रिंसिपल सेंट जेवियर्स कॉलेज ने दी । स्वागत भाषण रिटायर्ड जस्टिस हाई कोर्ट रत्नाकर भेंगरा ने दिया ।कार्यक्रम का परिचय ए के रसीदी ,महासचिव इंडियन एसोसिएशन आफ लॉयर्स ने दी। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के जज संदीप मेहता ने कार्यक्रम को विस्तार से बताया। जस्टिस इक़बाल ने विधिशास्त्र के क्षेत्र में एक लंबी लकीर खींची है। “फेयर ट्रायल” की पक्षता में उनका अविस्मरणीय योगदान रहा है।

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आज उनके गृह जिले रांची में आकर सुखद अनुभव हो रहा है। हम अच्छे मित्र, अच्छे साझेदार और विधिवत प्रोफेशनल्स रहे हैं। उनके कार्यों की लंबी सूची है। बतौर एक बेहतर इंसान वो व्यग्तिगत स्वायत्ता और कानून के बीच हमेशा संतुलन रखते थे। यही समझ ने उनको इतना बड़ा बनाया।

जीवन चक्रः

  • जन्म 13 फरवरी 1951 को यहां रांची में हुआ।
  • 1970 में रांची विश्विद्यालय से स्नातक हुआ।
  • 1993 में वो सरकारी उच्च न्यायालय में सरकारी वकील बने।
  • वो सिविल, क्रिमिनल, विधिक मामलों एवं टैक्स मामलों के वृहत जानकर थे।
  • 9 मई 1996 को पटना उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति के रूप में नियुक्त हुए।
  • 14 नवंबर 2000 को झारखंड उच्च न्यायलय के न्यायमूर्ति के रूप पदस्थापित हुए।
  • इस दौरान सामाजिक न्याय के पक्ष में सदैव मुखर रहे। इससे संबंधित सुनवाइयों को प्रमुखता के साथ देखा। दायर पी.आई.एल से संबंधित मामलों को संजीदगी के साथ सुनवाई पूरी की।
  • एसिड अटैक के सरवाईवर्स के प्रति अभूतपूर्व फैसले में उनको दिव्यांगता की श्रेणी में डालने का फैसला सुनाया।
  • महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई अहम फैसले लिए।
  • एसिड अटैक के सरवाईवर्स, बलात्कार के सरवाईवर्स, यौनिक हिंसा की शिकार महिलाओं के लिए कोर्ट के माध्यम से अभियुक्त द्वारा मुआवजा की गारन्टी और कठोर दंड का प्रावधान।
  • संविधान के अनुछेद 21 एवं 22 के तहत गरिमा के साथ जीवन जीने के अधिकार की व्याख्या को अपने सूझबूझ और योगदान से और भी समृद्ध किया। उनके कई जजमेंट में इसकी प्रबल छाप दिखती है।


संविधान के स्वरूप के तहत व्यक्ति और सत्ता के बीच के अंतर को उन्होंने विधिवत अंगीकार कराया जाए। जस्टिस एम वाई इकबाल हमेशा न्याय के पथ पर रहे। इस अवसर पर झारखंड उच्च न्यायालय मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एम एस रामचन्द्र राव, झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद, जस्टिस रॉन्गन मुखोपाध्याय, जस्टिस आनंदा सेन, जस्टिस अनिल कुमार चौधरी, जस्टिस नवनीत कुमार,जस्टिस संजय प्रसाद झारखंड हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रत्नाकर भेंगरा, राजेंद्र कृष्णा अध्यक्ष , झारखंड बार काउंसिल, वाई एस लोहित, महासचिव इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स, ए के रशीदी, जनरल सेक्रेटरी इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स,झारखंड, अधिवक्ता अजहर अहमद खान, फादर पीटर मार्टिन, अफाक रशीदी, हैदर अली, सुभाशीष रसिक सोरेन, रज़उल्लाह अंसारी, वाइजर रहमान, मो. आजम, अमानत खान, आयशा सिद्दीकी, दीपशिखा, पूजा, प्रीति हेंब्रम ,अमित सिन्हा ,पूजा ,अमन खान, कमर इमाम, आशीष कुमार, मृणाली, हैदर अली, जैद एहमद, शहाबुद्दीन, सचिन, कमर इमाम, अफसर रजा, आसिफ खान, शमीम सलीम, आसिफ इकबाल, रंजन ठाकुर, शंभू प्रसाद, दिलीप महतो, अयाज़ हैदर, आलिया बेगम, शाहिस्ता बेगम, जब्बार , अरशद खान, गुलरेज अंसारी, बीरेंद्र शर्मा, राजकुमार सिंह, अशोक कुमार , उदय सिन्हा, राजकुमार, समेत झारखंड के अलग अलग जिलें एवं उच्च न्यायालय के अधिवक्ता तथा न्यायिक अधिकारी और कानून से जुड़े काफी व्यक्ति शामिल हुए।

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