Ranchi News: झारखंड उच्च न्यायालय की खंडपीठ (न्यायमूर्ति एसएन प्रसाद और न्यायमूर्ति अखिल कुमार) में हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में बंद बांग्लादेशी महिला से कथित दुष्कर्म और अवैध हिरासत से जुड़े मामले में गुरुवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल आईजी (IG Jail) को राज्य के सभी डिटेंशन सेंटरों और महिला सुधार गृहों की उच्चस्तरीय जांच करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह स्पष्ट करने को कहा है कि इन केंद्रों की वर्तमान स्थिति क्या है और वहां बुनियादी सुविधाओं का कोई अभाव तो नहीं है।
मामले से जुड़े मुख्य बिंदु और अदालत के निर्देश:
बांग्लादेशी दूतावास से सत्यापन: अदालत ने केंद्र सरकार को यह निर्देश दिया है कि वह बांग्लादेशी दूतावास से संपर्क कर उक्त महिला की पहचान का सत्यापन (Identity Verification) करे। इस मामले में अब अगली सुनवाई 19 नवंबर को तय की गई है।
महिला सुधार गृह में स्थानांतरण: सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अदालत को जानकारी दी गई कि संबंधित महिला को नामकुम स्थित महिला सुधार गृह में स्थानांतरित किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता की मांगें: प्रार्थी अपूर्व विवेक की ओर से दायर याचिका में पीड़िता को अदालत के समक्ष पेश करने, हजारीबाग डिटेंशन सेंटर से तत्काल रिहा करने, हिरासत में हुए दुष्कर्म की स्वतंत्र जांच कराने और अवैध हिरासत के एवज में मुआवजे की मांग की गई थी।
डालसा (DALSA) की रिपोर्ट और कार्रवाई: इससे पूर्व, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DALSA), हजारीबाग द्वारा सीलबंद लिफाफे में सौंपी गई जांच रिपोर्ट में पीड़िता के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। सरकार ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में संलिप्त पाए गए रंजीत महतो समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है और उनसे स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
“महिला की गरिमा के साथ जीवन यापन की जिम्मेदारी राज्य की”
अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि डिटेंशन सेंटर में रहने के बावजूद पीड़िता खुद खाना बनाने को मजबूर थी। कोर्ट ने हैरानी जताई कि डिटेंशन सेंटर प्रशासन ने ऐसी लचर स्थिति कैसे उत्पन्न होने दी। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जब तक राज्य सरकार पीड़िता को डिटेंशन सेंटर में रख रही है, तब तक उसकी गरिमा के साथ जीवन यापन की मुकम्मल जिम्मेदारी राज्य की ही है। इससे पहले भी अदालत ने हजारीबाग के एसपी को डिटेंशन सेंटर का निरीक्षण कर पानी, बिजली, शौचालय/स्नानघर और नियमित स्वच्छ भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर चौबीसों घंटे तीन महिला और तीन पुरुष कांस्टेबलों की तैनाती सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया था।

