Ranchi News: बड़गाई स्थित 8.86 एकड़ ज़मीन की अवैध खरीद-बिक्री और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अपना जवाब (Counter Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से निचली अदालत (ED कोर्ट) के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर तय की है।
हेमंत सोरेन ने दायर की हैं दो अलग-अलग याचिकाएं
हेमंत सोरेन ने निचली अदालत द्वारा दिए गए दो फैसलों के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है:
डिस्चार्ज अर्जी खारिज होने के खिलाफ: ED कोर्ट द्वारा मामले से बरी (Discharge) करने की उनकी याचिका खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है।
संज्ञान (Cognizance) लेने के खिलाफ: ED द्वारा दाखिल चार्जशीट पर निचली अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान को रद्द करने की मांग की गई है।
बिना ‘अभियोजन स्वीकृति’ के संज्ञान लेना असंवैधानिक: बचाव पक्ष
सुनवाई के दौरान हेमंत सोरेन के अधिवक्ता ने पक्ष रखते हुए कहा कि ED कोर्ट ने इस मामले में ‘अभियोजन स्वीकृति’ (Prosecution Sanction) प्राप्त किए बिना ही संज्ञान ले लिया है।
बचाव पक्ष का तर्क: नियमानुसार और संवैधानिक प्रावधानों के तहत सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अभियोजन स्वीकृति लिए बिना किसी मामले में संज्ञान नहीं लिया जा सकता। इसलिए ED कोर्ट की यह कार्रवाई नियमविरुद्ध और असंवैधानिक है।
कोर्ट में अब तक क्या हुआ?
पहले मामले में (संज्ञान चुनौती): ED की ओर से इस याचिका पर अपना जवाब पहले ही दाखिल किया जा चुका है। इस पर हेमंत सोरेन के वकील ने ED के हलफनामे (Affidavit) पर अपना प्रतियुत्तर (Rejoinder) दाखिल करने के लिए अदालत से समय देने का अनुरोध किया।
दूसरे मामले में (चार्जफ्रेम चुनौती): डिस्चार्ज याचिका खारिज होने और आरोप तय किए जाने से जुड़ी याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए ED की ओर से अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया गया।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों के आग्रह को स्वीकार करते हुए ED को जवाब दाखिल करने की अनुमति दी और मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए 4 नवंबर की तिथि निर्धारित कर दी।

