Ranchi News: जमशेदपुर के टेल्को थाना क्षेत्र में युवाओं के दो गुटों के बीच हुई मारपीट और गुटबाजी के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दोनों पक्षों के बीच हुए पूर्ण और अंतिम समझौते (Compromise) को आधार मानते हुए सभी पांचों आरोपियों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही, पुलिस एफआईआर और चार्जशीट को रद्द (Quash) कर दिया है।
क्या था पूरा मामला? जमशेदपुर के बिरसानगर (हुल्लुंग) क्षेत्र के रहने वाले प्रिंस यादव, आकाश यादव, राहुल कुमार, सुजल तिवारी और एक नाबालिग (– यादव) के खिलाफ टेल्को थाना में एफआईआर (कांड संख्या 24/2026) दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता सत्यम प्रसाद भगत (18 वर्ष) ने आरोप लगाया था कि आपसी विवाद में उनके साथ मारपीट की गई, जिसके बाद पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 (हत्या का प्रयास) समेत अन्य धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच के बाद पुलिस ने 23 अप्रैल 2026 को अदालत में चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी।
हाईकोर्ट में समझौते की अर्जी चार्जशीट और एफआईआर को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं और सूचक (पीड़ित) दोनों के अधिवक्ताओं ने संयुक्त रूप से बताया कि यह घटना अचानक हुई मारपीट (Free Fight) का नतीजा थी और किसी की भी जान लेने की नीयत नहीं थी। अदालत को अवगत कराया गया कि यह केस और काउंटर-केस का मामला था, जिसमें दोनों पक्षों के अभिभावकों और पीड़ित ने आपस में बैठकर मामले का पूर्ण निपटारा कर लिया है। सूचक अब मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहता है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी और आदेश मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट के नरिंदर सिंह बनाम पंजाब राज्य के ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया। हाईकोर्ट ने माना कि जब दोनों पक्षों में आपसी रजामंदी हो चुकी है और हत्या के प्रयास की नीयत के पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं, तो ऐसी स्थिति में मुकदमे को जारी रखने से सजा होने की संभावना न के बराबर रह जाती है। अदालत ने कहा कि कानूनी कार्यवाही को आगे बढ़ाना केवल प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसके साथ ही अदालत ने एफआईआर, समनिंग ऑर्डर और चार्जशीट को रद्द कर याचिका स्वीकार कर ली।

