– पीएमएलए की विशेष अदालत ने धारा 309 CrPC के तहत दाखिल आवेदन को ठहराया आधारहीन – ED को ‘अविश्वसनीय दस्तावेज’ (Un-relied Documents) की सूची दोबारा उपलब्ध कराने का निर्देश
Ranchi News: जमीन घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग (ECIR 06/2023) के आरोपी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पीएमएलए (PMLA) की विशेष अदालत से बड़ा झटका लगा है। विशेष जज (A.J.C.-1) की अदालत ने मामले की कार्यवाही और आरोप (Charge) तय करने की प्रक्रिया को टालने के लिए हेमंत सोरेन की ओर से दाखिल अर्जी (u/s 309 CrPC) को खारिज कर दिया है।
हेमंत सोरेन के बचाव पक्ष की दलील:
हेमंत सोरेन की ओर से पैरवी करते हुए उनके वकील ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिकायत में पूरक शिकायत (Supplementary Complaint) दाखिल करने और आगे की जांच (Further Investigation) की अनुमति मांगी है। सर्वोच्च न्यायालय (विनु भाई हरि भाई मालवीय बनाम गुजरात राज्य) के सिद्धांतों का हवाला देते हुए तर्क दिया गया कि जब तक जांच जारी है, तब तक आरोप तय नहीं किए जा सकते और ट्रॉयल शुरू नहीं हो सकता।
ED की दलील और कोर्ट का फैसला:
ED के विशेष लोक अभियोजक (Spl. PP) ने अर्जी का विरोध करते हुए इसे सुनवाई टालने की रणनीति (Dilatory Tactic) बताया। उन्होंने कहा कि इससे पहले डिस्चार्ज याचिका खारिज होने के बाद हाईकोर्ट ने भी (Criminal Revision No. 982/2026) ट्रॉयल पर स्टे लगाने से इनकार कर दिया था।
विशेष अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आदेश में कहा:
पूरक जांच से ट्रॉयल पर रोक नहीं: PMLA की धारा 44(1)(d) का स्पष्ट प्रावधान है कि मूल शिकायत दाखिल होने के बाद भी आगे की जांच जारी रह सकती है और पूरक शिकायत मूल शिकायत का ही हिस्सा मानी जाती है। सुप्रीम कोर्ट (विजय मदनलाल चौधरी बनाम भारत सरकार) के अनुसार, जांच जारी रहने का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा मामले की सुनवाई रोक दी जाए।
आरोप तय करने की अगली तारीख: सोमवार को सिविल कोर्ट में जियो (Jio) सर्वर डाउन होने के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए हेमंत सोरेन की उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी। अदालत ने अगली सुनवाई और आरोप तय (Framing of Charge) करने के लिए 24 सितंबर 2026 की तारीख मुकर्रर की है।

