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HC News: बेटी शादीशुदा है तो क्या हुआ, अनुकंपा पर नौकरी का हक नहीं छीन सकते, 13 साल पुराने मामले में HC का बड़ा फैसला

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By Devesh Ananad On 07 Sep, 2026
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Ranchi: झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि शादीशुदा बेटी को भी अनुकंपा पर नौकरी पाने का अधिकार है। पति की आय होने से पिता पर उसकी निर्भरता खत्म नहीं होती।

जस्टिस दीपक रोशन की बेंच ने कोल माइंस प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (सीएमपीएफओ) को दिवंगत कर्मचारी की विवाहिता बेटी को आठ सप्ताह के भीतर अनुकंपा पर नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि यदि महिला अपने पिता पर आर्थिक रूप से निर्भर थी, तो केवल शादीशुदा होने के आधार पर उसका दावा खारिज नहीं किया जा सकता।

अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता के पास आय का कोई स्वतंत्र साधन नहीं है और वह अपनी बीमार मां के साथ रहकर उनकी देखरेख कर रही है। कोर्ट ने माना कि नियोक्ता ने पति की मामूली आय को पिता पर निर्भरता खत्म होने के रूप में गलत तरीके से समझा गया। याचिकाकर्ता की आर्थिक निर्भरता साबित होने के कारण हाईकोर्ट ने सीएमपीएफओ को आठ सप्ताह के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया।

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2013 में हुई पिता की मौत, 2017 में आवेदन खारिज

धनबाद की कोयला खदान में सहायक पद पर कार्यरत अर्जुन प्रसाद का 25 नवंबर 2013 को सेवा के दौरान निधन हो गया था। उनके निधन के बाद विधवा पत्नी ने अपनी बेटी को अनुकंपा पर नौकरी देने का प्रस्ताव दिया। हालांकि, सीएमपीएफओ ने जुलाई 2017 में बेटी के विवाहित होने का हवाला देकर आवेदन खारिज कर दिया था।

इसके बाद बेटी ने 2023 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने उसे नए सिरे से आवेदन देने की अनुमति दी, लेकिन अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान संगठन ने फरवरी 2024 में फिर दावा खारिज कर दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने दोबारा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।

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किडनी देने के कारण मृतक की पत्नी असमर्थ

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता रत्नेश कुमार ने कोर्ट को बताया, महिला की मां शारीरिक श्रम में सक्षम नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने पति को एक किडनी दान की थी। वहीं, दोनों बेटों ने मां की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया है। वे अलग रहते हैं। पिता की मौत के बाद मां की देखभाल बेटी कर रही है।

मां-बेटी मामूली पेंशन से जीवन गुजार रही हैं। सीएमपीएफओ की ओर से अधिवक्ता प्रशांत सिंह ने दलील दी कि पिता की मृत्यु के समय बेटी शादीशुदा थी। उसका पति कमाता है और उसके दोनों भाई भी नौकरी करते हैं। ऐसे में पिता पर पूरी तरह निर्भर नहीं माना जा सकता। अदालत ने इन दलीलों को दरकिनार करते हुए विवाहिता पुत्री को नौकरी देने का निर्देश दिया है।

Devesh Ananad

देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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