Ranchi: जेपीएससी परीक्षा में अनियमितता के मामले में जेल में बंद पूर्व मुख्य सचिव और झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते को अदालत से राहत नहीं मिली।
शनिवार को अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। ख्यांग्ते की ओर से कहा गया कि उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। उनके ठिकानों पर हुई छापेमारी में भी ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे उनकी संलिप्तता साबित हो सके।
वहीं, सीआईडी की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि परीक्षा आयोजन का जिम्मा टीडीपीएल को सौंपने में ख्यांग्ते की अहम भूमिका थी। जांच एजेंसी के अनुसार, टीडीपीएल की ओर से आयोजित परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही थी और इसकी जानकारी ख्यांग्ते को थी। इसके बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।
अभय तिवारी के बयान का भी हवाला
सीआईडी ने अदालत में जेपीएससी नियुक्ति घोटाले के कथित किंगपिन अभय तिवारी के स्वीकारोक्ति बयान का भी हवाला दिया। बताया गया कि तिवारी ने जांच अधिकारियों के समक्ष दिए बयान में ख्यांग्ते की घोटाले में कथित संलिप्तता का उल्लेख किया है। उसने यह भी कहा है कि टीडीपीएल को परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी के रूप में चयन करने में ख्यांग्ते की अहम भूमिका थी।

