बचाव पक्ष के अधिवक्ता प्रितांशु कुमार सिंह ने कहा- पीड़िता ने जिरह में जबरन संबंध से किया इनकार
Ranchi News: सिविल कोर्ट रांची के अपर न्यायायुक्त-20 अरविंद कुमार नंबर-2 की अदालत ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोप में सूरज गोप को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। नगड़ी थाना कांड संख्या –/2023 से जुड़े मामले में अदालत ने फैसला सुनाया। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रितांशु कुमार सिंह ने पैरवी की। पीड़िता ने जिरह के दौरान स्वीकार किया कि आरोपी ने उसके साथ कभी जबरन शारीरिक संबंध नहीं बनाया था। उसने यह भी कहा कि वह आरोपी से शादी करना चाहती थी और शादी नहीं होने के कारण मामला दर्ज कराया था। उसने मुकदमा आगे नहीं लड़ने की बात भी कही। मामले में अभियोजन ने तीन गवाह पेश किए। इनमें अनुसंधानकर्ता औपचारिक गवाह रहे, जबकि ग्रामीण गवाह पिंटू महतो पक्षद्रोही हो गए।
अभियोजन के अनुसार वर्ष 2019 से जनवरी 2023 के बीच आरोपी ने शादी का झांसा देकर पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता ने गर्भवती होने और बाद में आरोपी द्वारा शादी से इनकार करने का आरोप लगाते हुए 27 जनवरी 2023 को नगड़ी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोपी के खिलाफ धारा 376(2)(n), 417 और 323/34 भादवि के तहत आरोप तय किए गए थे। अदालत ने पाया कि अभियोजन अन्य महत्वपूर्ण गवाहों को भी पेश नहीं कर सका। चिकित्सकीय गवाही और मेडिकल रिपोर्ट को भी विधिवत साबित नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि अभियोजन आरोपों को सभी संदेहों से परे साबित करने में असफल रहा। केवल संदेह के आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती। इसके बाद अदालत ने सूरज गोप को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।

