Ranchi News: रांची के जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुए चर्चित अर्जुन लिंडा हत्याकांड में शुक्रवार को रांची की एक स्थानीय अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। अपर न्यायायुक्त कुलदीप की अदालत ने मामले में पूर्व में दोषी करार दिए गए अभियुक्त विकास तिर्की को आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सख्त सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर आर्थिक दंड और पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे का भी निर्धारण किया है।
जुर्माना और मुआवजा न देने पर अतिरिक्त सजा:
न्यायालय ने अपने आदेश में सजा के साथ-साथ निम्नलिखित शर्तें तय की हैं:
- आर्थिक जुर्माना: दोषी विकास तिर्की पर 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यदि वह इस जुर्माने की राशि को जमा करने में विफल रहता है, तो उसे अतिरिक्त डेढ़ साल (18 महीने) की जेल की सजा काटनी होगी।
- पीड़ित परिवार को मुआवजा: अदालत ने विकास तिर्की को निर्देश दिया है कि वह मृतक अर्जुन लिंडा के कानूनी उत्तराधिकारियों (आश्रितों) को 25 हजार रुपये का मुआवजा प्रदान करे। मुआवजा राशि जमा नहीं करने की स्थिति में उसे एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
गौरतलब है कि अदालत ने दोनों पक्षों की लंबी बहस और गवाहों के बयानों को दर्ज करने के बाद बीते 17 जून 2026 को ही अभियुक्त विकास तिर्की को इस हत्याकांड का दोषी करार दे दिया था, जिसकी सजा का ऐलान शुक्रवार को किया गया।
क्या है वर्ष 2021 का यह पूरा मामला?
यह आपराधिक मामला अगस्त 2021 का है। अभियोजन पक्ष (Prosecution) द्वारा अदालत में पेश की गई कहानी के अनुसार:
- अंतिम बार साथ देखा जाना: 15 अगस्त 2021 को स्वतंत्रता दिवस के दिन न्यू लटमा निवासी अर्जुन लिंडा और विकास तिर्की समेत कई अन्य लोगों ने एक साथ बैठकर बीयर पी थी। इसके बाद विकास तिर्की, अर्जुन लिंडा को अपने साथ किसी बहाने से लेकर चला गया था, जिसके बाद से अर्जुन लापता था।
- शव की बरामदगी: घटना के पांच दिन बाद, यानी 20 अगस्त 2021 को जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के सोलंकी कब्रिस्तान के पास से अर्जुन लिंडा का शव बेहद सड़ी-गली और क्षत-विक्षत अवस्था में बरामद किया गया था।
- प्राथमिकी और सजा का आधार: इस संबंध में मृतक के भाई करण लिंडा की लिखित शिकायत पर जगन्नाथपुर थाने में हत्या और साक्ष्य छुपाने की प्राथमिकी दर्ज की गई थी। चूंकि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी (Eye-witness) नहीं था, इसलिए अदालत ने पूरे मामले में कड़ियों से कड़ियां जोड़ते हुए परिस्थितिजन्य साक्ष्यों (Circumstantial Evidence) और गवाहों के बयानों को अकाट्य माना। अदालत ने विकास तिर्की को हत्या करने और साक्ष्य मिटाने (दफनाने/छुपाने) का दोषी पाते हुए यह सख्त सजा सुनाई।

