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Court News: निर्मल हृदय बच्चा सौदा: 6 साल में गवाह नहीं ला पाया अभियोजन, सिस्टर कांसिलिया समेत दोनों आरोपी बरी

CourtNews Desk
By CourtNews Desk On 19 Jun, 2026
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अदालत ने थकाया तो बंद करना पड़ा अभियोजन साक्ष्य, 2018 में देश भर में गूंजा था यह हाईप्रोफाइल मामला

Ranchi News: मिशनरीज ऑफ चैरिटी द्वारा संचालित जेल रोड स्थित ‘निर्मल हृदय आश्रम’ से नवजात बच्चों की कथित खरीद-फरोख्त (तस्करी) के बहुचर्चित मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। राँची के अपर न्यायायुक्त शैलेन्द्र कुमार की अदालत ने पुख्ता साक्ष्य और गवाहों के अभाव में मुख्य आरोपी सिस्टर कांसिलिया बाखला और आश्रम की कर्मचारी अनिमा इंदवार को ससम्मान बरी कर दिया है। वर्ष 2018 में जब यह मामला सामने आया था, तब इसने न सिर्फ झारखंड बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी जमकर सुर्खियां बटोरी थीं और इस पर भारी सियासी बवाल मचा था।

कोर्ट ने किए हरसंभव प्रयास, पर नाकाम रहा अभियोजन

अदालत में इस मामले के ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष की बड़ी लापरवाही और लाचारी सामने आई। मामले में 25 फरवरी 2019 को ही आरोपियों पर आरोप (चार्ज) तय कर दिए गए थे। इसके बाद अदालत ने गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए समन और नोटिस सहित हरसंभव कानूनी प्रयास किए। लेकिन हैरानी की बात है कि छह साल का लंबा समय बीत जाने के बावजूद अभियोजन पक्ष गवाहों को कोर्ट के समक्ष पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा। गवाहों के न आने पर अंततः अदालत ने अभियोजन साक्ष्य (Prosecution Evidence) को बंद कर दिया। इसके बाद दोनों आरोपियों का बयान दर्ज किया गया और साक्ष्य के अभाव में उन्हें दोषमुक्त करार दिया गया।

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📂 CWC की शिकायत पर दर्ज हुई थी प्राथमिकी

यह पूरा विवाद चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की तत्परता के बाद उजागर हुआ था। सीडब्ल्यूसी की तत्कालीन अध्यक्ष रूपा कुमारी की लिखित शिकायत पर राँची के एएचटीयू (Anti Human Trafficking Unit) थाने में कांड संख्या 04/2018 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

  • क्या था आरोप: प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी के जेल रोड स्थित केंद्र के माध्यम से नवजात बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त और तस्करी की जा रही है। कुमारी माताओं के बच्चों का सौदा मोटी रकम लेकर किया जा रहा था।
  • मिली थी जेल: मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने 7 जुलाई 2018 को सिस्टर कांसिलिया बाखला और अनिमा इंदवार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उस वक्त मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने दोनों की जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी।
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