Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश सह झालसा के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने कहा कि इतिहास से सीख लेकर न्याय को अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना ही विधिक सेवा संस्थाओं का मूल उद्देश्य है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पीएलवी प्रणाली न्याय व्यवस्था की “मुख्य ऊर्जा” और “बटालियन” है, क्योंकि वही सुदूर क्षेत्रों में रहकर जमीनी समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाते हैं और जरूरतमंदों को योजनाओं से जोड़ते हैं। वे शनिवार को डोरंडा स्थित शौर्य सभागार में आयोजित झालसा की छठी राज्य स्तरीय बैठक में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विधिक सशक्तिकरण शिविरों के माध्यम से लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें हाशिये से मुख्यधारा में लाना जरूरी है। यदि अंतिम व्यक्ति तक लाभ नहीं पहुंचा तो पूरी व्यवस्था निष्प्रभावी हो जाएगी।

जस्टिस प्रसाद ने डायन प्रथा और मानव तस्करी को राज्य की गंभीर सामाजिक चुनौतियां बताते हुए पीएलवी से इन मुद्दों पर विशेष निगरानी और जनजागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तस्करी पीड़ितों के पुनर्वास के लिए बनाई गई नीतियों का सख्ती से पालन होना चाहिए, तभी इस अपराध पर प्रभावी रोक लगेगी। पॉक्सो मामलों में कम दोषसिद्धि दर पर चिंता जताते हुए उन्होंने वैज्ञानिक जांच, साक्ष्य संरक्षण और संवेदनशील कार्रवाई पर जोर दिया, ताकि पीड़ितों को वास्तविक न्याय मिल सके।

इससे पूर्व बैठक का उद्घाटन जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद, जस्टिस आनंद सेन, जस्टिस ए.के. चौधरी तथा पूर्व न्यायाधीश अंबुज नाथ ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। स्वागत भाषण झालसा की सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना ने दिया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन उप सचिव अभिषेक कुमार ने किया। बैठक में राज्य के सभी जिलों के डीसी, एसपी, डीएलएसए पदाधिकारी, जेल अधीक्षक, पीएलवी और अन्य हितधारकों की भागीदारी रही। दो दिवसीय यह बैठक एक मार्च तक पांच तकनीकी सत्रों के साथ जारी रहेगी।
जमीनी अंतर पाटने में पीएलवी अहम : जस्टिस आनंद सेन
जस्टिस आनंद सेन ने कहा कि नीतियों और जमीनी हकीकत के बीच जो अंतर है, उसे पाटने में पीएलवी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने अन्याय की सही पहचान और संवेदनशील हस्तक्षेप पर जोर दिया।
हितधारकों के समन्वय का प्रभावी मंच : जस्टिस ए.के. चौधरी
जस्टिस ए.के. चौधरी ने कहा कि झालसा ने अंतिम व्यक्ति तक विधिक सहायता पहुंचाने में उल्लेखनीय काम किया है। उन्होंने इस बैठक को न्यायपालिका, प्रशासन और पुलिस सहित सभी हितधारकों के समन्वय का मजबूत मंच बताया।

‘प्रोजेक्ट बाल सुरक्षा’ का आगाज, 24 न्याय रथ रवाना
कार्यक्रम के दौरान ‘प्रोजेक्ट बाल सुरक्षा’ का विधिवत शुभारंभ किया गया और नालसा व झालसा की योजनाओं-परियोजनाओं के संकलन का विमोचन हुआ। झालसा के कर्मियों और पीएलवी को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया तथा पीड़ित मुआवजा से संबंधित चेक लाभार्थियों को वितरित किए गए। साथ ही सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के लिए 24 बोलेरो बहुउपयोगी वाहन ‘न्याय रथ’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, जो विधिक सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने में सहायक होंगे।