Ranchi News: फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए जमीन हड़पने से जुड़े मामले में आरोपी राजकुमार सिंह को कोर्ट से राहत नहीं मिली। न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 की अदालत ने डिस्चार्ज याचिका खारिज करने के आदेश के खिलाफ दाखिल आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने जेएमएफसी-21 द्वारा 2 अगस्त 2025 को पारित आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि केस डायरी में आरोप तय करने के लिए पर्याप्त प्रथमदृष्टया सामग्री उपलब्ध है। ऐसे में निचली अदालत के आदेश में किसी प्रकार की कानूनी या तथ्यात्मक त्रुटि नहीं पाई गई। 2015 में दर्ज बरियातू थाना कांड संख्या से जुड़ा मामवा है, जिसमें आईपीसी की धारा 419, 420, 466, 467, 468 और 471 के तहत आरोप हैं।
आरोप है कि फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए जमीन पर कब्जा कर मैरिज हॉल का संचालन किया गया। पुलिस जांच के बाद राजकुमार सिंह और एक अन्य आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। रिवीजन याचिका में दलील दी गई कि आरोपी न तो एफआईआर में नामजद है और न ही उसके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य है। केवल दस्तावेज का गवाह होना अपराध साबित नहीं करता। हालांकि अदालत ने कहा कि चार्ज फ्रेमिंग के स्तर पर साक्ष्यों का सूक्ष्म मूल्यांकन आवश्यक नहीं होता, बल्कि प्रथमदृष्टया संलिप्तता पर्याप्त है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि इस स्तर पर मिनी ट्रायल की अनुमति नहीं है। पर्याप्त सामग्री होने पर आरोपी को ट्रायल का सामना करना होगा। इसी आधार पर अदालत ने आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी और निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा।

