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Jharkhand News/H Court: 22 साल पुराने दुष्कर्म मामले में दोषी की अपील खारिज, हाईकोर्ट ने कहा– पीड़िता की गवाही विश्वसनीय, सरेंडर करने का आदेश

CourtNews Desk
By CourtNews Desk On 11 Dec, 2025
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Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने 14 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के 22 साल पुराने मामले में दोषी रवींद्र प्रसाद की अपील खारिज कर दी है। जस्टिस एके राय की कोर्ट ने दुमका सत्र न्यायालय के वर्ष 2003 में सुनाई गई सात साल की सश्रम कैद की सजा को सही ठहराया और आरोपी को तुरंत कोर्ट में आत्मसमर्पण करने का आदेश भी दिया है। आरोपी अभी जमानत पर था। अदालत ने कहा कि इस मामले में पीड़िता की गवाही विश्वसनीय है और उसे अस्वीकार करने का कोई आधार नहीं है।


शिवरात्रि मेले में हुई थी घटना
घटना 12 मार्च 2002 की है। दुमका के मसालिया थाना क्षेत्र में शिवरात्रि मेले के दौरान पीड़िता अपने पिता की मिठाई की दुकान पर मौजूद थी। रात करीब 8:30 बजे वह शौच के लिए निकली। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला आरोपी उसे जबरन बगल के सुनसान स्थान पर ले गया और दुष्कर्म किया। पीड़िता किसी तरह घर पहुंची और मां व बुआ को पूरी बात बताई। अगले दिन गांव में पंचायत हुई। पंचायत में आरोपी ने शादी करने की बात की, लेकिन बाद में दहेज की मांग के कारण समझौता नहीं हो सका। लगातार दो दिन तक पंचायत में मामला नहीं सुलझा। इसके बाद 14 मार्च को पीड़िता ने मसालिया थाना में बयान दर्ज कराया।

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आठ गवाहों की गवाही हुई, उम्र स्कूल प्रमाणपत्र से साबित
ट्रायल में कुल आठ गवाहों की गवाही हुई। पीड़िता का बयान, उसके माता-पिता और बुआ की गवाही अदालत को विश्वास दिलाने के लिए पर्याप्त मानी गई। पलोजोरी गर्ल्स हाई स्कूल के प्रधानाध्यापक द्वारा जारी जन्मतिथि प्रमाणपत्र में पीड़िता की जन्मतिथि 03 जून 1987 दर्ज है। अदालत ने इसे विश्वसनीय मानते हुए घटना के समय उसकी उम्र 14 वर्ष 9 माह मानी।


निचली अदालत के आदेश के खिलाफ अपील करते हुए आरोपी की ओर से कहा गया कि इस मामले में प्राथमिकी दो दिन देर से हुई है। मेडिकल रिपोर्ट में पीड़िता की उम्र 15- 16 वर्ष बतायी गयी है। कोई कपड़ा जब्त नहीं किया गया है। निचली अदालत ने पूरे तथ्यों पर गौर किए बिना फैसला सुनाया है। इस पर अदालत ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे मामलों में पंचायत के कारण देरी होना सामान्य है। मेडिकल रिपोर्ट ठीक से साबित नहीं हुई, इसलिए उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। स्कूल प्रमाणपत्र उम्र का अधिक विश्वसनीय आधार है। अदालत ने कहा कि पीड़िता ने घटना का सीधा और स्पष्ट वर्णन किया है और उसका बयान किसी भी बुनियादी विसंगति से मुक्त है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पीड़िता की गवाही भरोसेमंद हो, तो अकेली गवाही से भी दोषसिद्धि संभव है। अदालत ने प्रार्थी की अपील खारिज करते हुए तुरंत सरेंडर करने का निर्देश दिया।

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