Ranchi: राज्य के विश्वविद्यालयों से संबद्ध बीएड कॉलेजों में एनसीटीई (राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद) के नियमों की अनदेखी कर छात्रों के अनुपात में शिक्षक नियुक्ति नहीं किए जाने और अन्य अनियमितताओं को लेकर दायर जनहित याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में प्रार्थी अनंत राज जेजावारे की ओर से याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत याचिका को निष्पादित कर दिया। साथ ही अदालत ने प्रार्थी को छूट दी कि वे विश्वविद्यालयों के कॉलेजों की सूची और संबंधित शिकायतों के साथ एनसीटीई के ईस्टर्न रीजनल कमेटी कार्यालय में आवेदन दें। अदालत ने एनसीटीई को इस अभ्यावेदन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रार्थी की शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं की जाती है तो उन्हें दोबारा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की छूट होगी। सुनवाई के दौरान प्रार्थी के अधिवक्ता उत्पल कांत ने अदालत को बताया कि रांची विश्वविद्यालय, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, सिद्धू कान्हू विश्वविद्यालय, विनोद बिहारी विश्वविद्यालय, कोल्हन विश्वविद्यालय समेत राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों के बीएड कॉलेजों में एनसीटीई एक्ट 14 के नियमों के अनुरूप शिक्षक नियुक्त नहीं किए गए हैं और कॉलेज जैसे-तैसे संचालित हो रहे हैं। यह नियमों का उल्लंघन है।
उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि राज्य सरकार और विश्वविद्यालयों को नियम के अनुरूप शिक्षक नियुक्ति और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाए। वहीं, एनसीटीई की ओर से अदालत को बताया गया कि यदि शिकायतों की सूची उपलब्ध कराई जाती है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। इस पर अदालत ने याचिका को निष्पादित कर दिया।

