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सुप्रीम कोर्ट का फैसलाः सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद तलाक लेने वाली बेटी अनुकंपा पर नौकरी की हकदार नहीं

New Delhi: Compassionate Job सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी सरकारी कर्मचारियों की मौत के बाद तलाक लेने वाले मृतक (कर्मचारी) की बेटी अनुकंपा नियुक्ति की हकदार नहीं होगी। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कर्नाटक के कोषागार निदेशक द्वारा दायर उस अपील को स्वीकार कर लिया जिसमें कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार को वी.सोम्याश्री को अनुकंपा नियुक्ति देने का निर्देश दिया गया था।

उसकी मां पी. भाग्यम्मा मांड्या जिले में द्वितीय श्रेणी सहायक के रूप में कार्यरत थीं, जिसकी 25 मार्च 2012 में मृत्यु हो गई थी। कर्नाटक सिविल सेवा (अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति) नियम, 1996 पर गौर करने के बाद शीर्ष अदालत ने पाया कि उस समय के मानदंडों के अनुसार तलाकशुदा बेटी के लिए अनुकंपा नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं था।

इसे भी पढ़ेंः DEFAMATION CASE: अदालत ने कहा- 20 सितंबर को पेश न होने पर कंगना रनौत के खिलाफ जारी किया जाएगा वारंट

केवल अविवाहित बेटी और विधवा बेटी, जो मृतक महिला सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के वक्त उन पर निर्भर हो और उसके साथ रह रही है, उसे ही अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए योग्य माना जाएगा। तलाकशुदा बेटी शब्द को बाद में 2021 में एक संशोधन द्वारा इसमें जोड़ा गया।

मौजूदा मामले में शीर्ष अदालत ने पाया कि जब 25 मार्च, 2012 को कर्मचारी की मृत्यु हुई तो सोम्याश्री उसकी विवाहित बेटी थी और उसकी शादी बरकरार थी। हालांकि अपनी मां की मृत्यु के बाद उसने 12 सितंबर, 2012 को आपसी सहमति से तलाक ले लिया। अदालत ने 20 मार्च, 2013 को तलाक को मंजूरी दे दी। अगले ही दिन यानी 21 मार्च 2013 को उसने अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए आवेदन किया था।

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