Jamshedpur/Ranchi: झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकलपीठ ने जमशेदपुर के गोलमुरी थाना क्षेत्र (केस सं.- 188/1997) से जुड़े 29 साल पुराने मारपीट के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है (Cr. Appeal (S.J.) No. 1508 of 2005)। अदालत ने निचली अदालत द्वारा दो मुख्य आरोपियों को दी गई एक-एक साल की सजा को घटाकर उनके द्वारा अब तक जेल में बिताई गई अवधि (20 दिन) तक सीमित (Sentence Modified) कर दिया है।
क्या था मामला?
मामला 08 नवंबर 1997 का है। गोलमुरी के नामदा बस्ती (आनंद नगर) निवासी अमरनाथ गिरि के घर में घुसकर आरोपियों ने पुराना मुकदमा वापस लेने की धमकी दी और मारपीट की थी। हमले में सूचक और उसकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
साल 2005 में जमशेदपुर की निचली अदालत ने फैसला सुनाते हुए:
- हीरालाल शर्मा और मोतीलाल शर्मा को धारा 323 (मारपीट) के तहत दोषी पाते हुए 1-1 साल की सजा और ₹500 जुर्माना लगाया था।
- वहीं सुमित्रा देवी और मुनि देवी को धारा 448 (घर में घुसना) और 352 में दोषी ठहराते हुए प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट का लाभ देकर जमानत बॉन्ड पर रिहा कर दिया था।
हाईकोर्ट का फैसला
दोषियों ने 2005 में हाइकोर्ट में अपील दायर की थी। सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने दलील दी कि घटना को लगभग तीन दशक (29 वर्ष) बीत चुके हैं, दोनों आरोपी अब 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग हो चुके हैं और 20 दिन जेल में बिता चुके हैं, इसलिए अब उन्हें दोबारा जेल भेजना उचित नहीं होगा। अदालत ने दोषसिद्धि (Conviction) को सही ठहराते हुए कहा कि लंबे समय तक चले मुकदमे का मानसिक दंश आरोपियों ने भोगा है। न्याय हित में उनकी सजा को जेल में बिताई गई अवधि (20 दिन) तक ही सीमित करते हुए उन्हें बेल बॉन्ड और सभी देनदारियों से मुक्त (Discharged) कर दिया गया।

