Ranchi News: झारखंड की जेलों में भोजन की गुणवत्ता और कैदियों की सुविधाओं को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस ए.के. राय की खंडपीठ ने कैदियों की बहुसदस्यीय समिति द्वारा जेल कैंटीन संचालित करने की अनुमति तो दी, लेकिन स्पष्ट कहा कि किसी भी अनियमितता की जिम्मेदारी जेलर की होगी। अदालत ने चेतावनी दी कि निरीक्षण में गड़बड़ी पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई का आदेश दिया जाएगा।
जेलों में आकस्मिक निरीक्षण के निर्देश
हाईकोर्ट ने वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए डीएलएसए (रांची) के चेयरमैन और सचिव को किसी अवकाश के दिन आकस्मिक निरीक्षण करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही राज्य के सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को भी नियमित निरीक्षण कर दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि झालसा और सभी डालसा इस प्रकार के निरीक्षण लगातार सुनिश्चित करें। मामले की अगली सुनवाई 11 दिसंबर को निर्धारित है।
जेल अधिकारियों की उपस्थिति और रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा के जेल अधीक्षक सुदर्शन मुर्मू और जेलर लवकुश कुमार कोर्ट में उपस्थित हुए।
अदालत के समक्ष कैदियों की समिति द्वारा संचालित कैंटीन से जुड़े चयन रजिस्टर भी प्रस्तुत किया गया। जेलर ने कोर्ट को बताया कि अब कैदियों को भोजन जेल मैनुअल के अनुरूप उपलब्ध कराया जा रहा है। गृह सचिव और कारा महानिरीक्षक की ओर से भी राज्य की सभी जेलों में भोजन की गुणवत्ता पर रिपोर्ट लेकर शपथपत्र दायर किया गया। सरकारी अधिवक्ता पंकज कुमार ने भी अदालत को अवगत कराया कि भोजन की गुणवत्ता में सुधार किया गया है और अब आपूर्ति मैनुअल के अनुसार की जा रही है।
पूर्व जेलर पर कार्रवाई की सूचना
जेलर लवकुश कुमार ने अदालत को बताया कि उन्होंने 11 नवंबर 2025 को कार्यभार ग्रहण किया है। उनके पूर्ववर्ती जेलर देवनाथ राम पहले से ही निलंबित हैं, और उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही विचाराधीन है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अगली तिथि पर विभागीय कार्रवाई की वर्तमान स्थिति और मामले से जुड़े कथित षड्यंत्र की जानकारी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

