Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने अपील दाखिल करने में हुई 236 दिनों की देरी को माफ करने से इनकार करते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति दीपक रोशन की खंडपीठ ने कहा कि सरकारी विभाग महज फाइलों के एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी तक जाने, कानूनी राय लेने और प्रक्रिया में समय लगने का सामान्य हवाला देकर इतनी लंबी देरी की माफी नहीं मांग सकते। मामला कोडरमा के राजीव कुमार सिंह और अंकित कुमार चौधरी से जुड़ा है। एकल पीठ ने 19 अगस्त 2024 को डब्ल्यूपी (सी) संख्या 3070/2024 का निपटारा किया था। इस आदेश को चुनौती देने में राज्य सरकार की ओर से 236 दिन की देरी हुई। देरी माफ कराने के लिए राज्य ने आवेदन दाखिल किया था।
खंडपीठ ने कहा कि आवेदन में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि प्रमाणित प्रति कब मांगी गई और कब मिली, कानूनी राय कब ली गई, अपील का निर्णय लेने में कितना समय लगा और अपील तैयार करने में कितने दिन लगे। इसलिए देरी की कोई निरंतर और ठोस वजह सामने नहीं आई। अदालत ने कहा कि कानून की नजर में सरकार और निजी पक्ष के लिए अलग-अलग सीमा अवधि नहीं है। प्रशासनिक सुस्ती और लापरवाही को पर्याप्त कारण नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि सरकारी विभागों को अपनी निष्क्रियता का लाभ नहीं दिया जा सकता। इसके साथ ही 236 दिन की देरी माफी का आवेदन और संबंधित अपील दोनों खारिज कर दिए गए।

