Jharkhand High Court

HC News: सहायक आचार्य नियुक्ति में आरक्षण की अनदेखी, विज्ञापन की शर्तों को हाई कोर्ट में दी गई चुनौती

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 09 Oct, 2026
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Ranchi: (HC News) झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के सहायक आचार्य नियुक्ति (विज्ञापन संख्या 04/2026) में आरक्षण, अनारक्षित पदों पर चयन और न्यूनतम अर्हक अंकों से संबंधित प्रावधानों को झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। राम प्रकाश यादव सहित 35 कार्यरत पारा शिक्षकों की ओर से अधिवक्ता तान्या सिंह ने रिट याचिका दायर की है।

आरक्षण की हुई अनदेखी

याचिका में कहा गया है कि कक्षा एक से पांच के लिए इंटरमीडिएट प्रशिक्षित सहायक आचार्य के 1,909 नियमित पदों तथा स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्य के सामाजिक विज्ञान विषय के 660 नियमित पदों में अत्यंत पिछड़ा वर्ग-I और पिछड़ा वर्ग-II के लिए शून्य रिक्तियां दर्शाई गई हैं।

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याचिकाकर्ताओं ने इन श्रेणियों में शून्य रिक्तियों के निर्धारण का आधार स्पष्ट करने के लिए मूल आरक्षण रोस्टर और पूर्व नियुक्तियों का श्रेणीवार विवरण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कराने की मांग की है।

इसके साथ ही विज्ञापन की उन शर्तों को चुनौती दी गई है, जिनके अनुसार आरक्षित श्रेणी के अर्हक मानदंड पर जेटेट अथवा अन्य शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों पर केवल उनकी संबंधित आरक्षित श्रेणी के पदों के लिए विचार किया जाएगा।

शर्तों की वजह से अभ्यर्थी होंगे प्रभावित

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नियुक्ति परीक्षा में पर्याप्त मेरिट प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को अनारक्षित पदों पर विचार किए जाने से रोकना अनुचित है। संबंधित श्रेणियों में रिक्तियां शून्य होने से यह प्रतिबंध उनके नियुक्ति के अवसरों को प्रभावित करता है।

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याचिका में मेरिट सूची में शामिल होने के लिए विज्ञापन द्वारा निर्धारित अतिरिक्त श्रेणीवार न्यूनतम अर्हक प्रतिशत पर भी आपत्ति उठाई गई है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि सहायक आचार्य नियमावली, 2022 में ऐसे अतिरिक्त समग्र अर्हक प्रतिशत का प्रावधान नहीं है।

इसके अतिरिक्त, केवल पारा शिक्षकों के लिए आयोजित इस भर्ती में उनके लंबे शिक्षण अनुभव को ध्यान में रखते हुए संबंधित विषयों अथवा प्रश्नपत्रों में न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक की अनिवार्यता में उचित छूट देने के प्रश्न पर परीक्षा से पहले राज्य सरकार से कारणयुक्त निर्णय लेने की मांग की गई है।

याचिका के माध्यम से विवादित शर्तों को निरस्त करने, आरक्षण रोस्टर की जांच कराने तथा पात्र अभ्यर्थियों को मेरिट के आधार पर अनारक्षित पदों पर विचार का अवसर देने की मांग की गई है।

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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