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HC News: 30 साल बाद टूटा रिश्ता! हाईकोर्ट ने दी तलाक की मंजूरी, पत्नी को गुजारा भत्ता 30 लाख

CourtNews Desk
By CourtNews Desk On 31 Mar, 2026
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Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद के एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि जब पति-पत्नी के बीच विश्वास खत्म हो जाए, तो ऐसे रिश्ते को जबरन बनाए रखना उचित नहीं है। कोर्ट ने लंबे समय से अलग रह रहे दंपती के मामले में पति को तलाक की अनुमति देते हुए पत्नी के लिए 30 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता तय किया है। Jharkhand High Court की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति Sujit Narayan Prasad और न्यायमूर्ति Sanjay Prasad शामिल थे, ने फैमिली कोर्ट, बेरमो (बोकारो) के फैसले को रद्द करते हुए विवाह को भंग घोषित कर दिया।कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पत्नी की कोई स्वतंत्र आय नहीं है, इसलिए उसका भविष्य सुरक्षित करना बेहद जरूरी है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि पत्नी को वही जीवन स्तर मिलना चाहिए, जैसा वह विवाह के दौरान जी रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए पति को 30 लाख रुपये एकमुश्त गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया है, जिसे 12 महीने के भीतर तीन समान किस्तों में चुकाना होगा।

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तीन दशक पुराना रिश्ता, 30 साल से अलगाव
मामला रमेश (परिवर्तित नाम) और आरती देवी (परिवर्तित नाम) से जुड़ा है। दोनों की शादी 15 जनवरी 1989 को पारंपरिक रीति-रिवाज से हुई थी। शादी के कुछ वर्षों बाद ही 1992 में गांव की मांझी हाड़ाम समिति के समक्ष आपसी सहमति से अलगाव होने का दावा किया गया। इसके बाद पति ने दूसरी शादी भी कर ली, लेकिन कानूनी रूप से तलाक नहीं होने के कारण विवाद बना रहा।

फैमिली कोर्ट ने खारिज की थी याचिका
पति ने दूसरी शादी को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए बेरमो फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की थी, लेकिन कोर्ट ने वैध कानूनी प्रमाण के अभाव में इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

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हाईकोर्ट ने बदला फैसला, शर्तों के साथ राहत
हाईकोर्ट ने लंबी अवधि के अलगाव, परिस्थितियों और रिश्ते में समाप्त हो चुके विश्वास को आधार बनाते हुए तलाक की अनुमति दे दी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया कि पत्नी आर्थिक रूप से सुरक्षित रहे। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि दंपती के बेटे का पैतृक संपत्ति पर अधिकार बना रहेगा और वह कानून के अनुसार अपना दावा कर सकता है। इस फैसले को वैवाहिक विवादों में “विश्वास” की अहमियत को रेखांकित करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

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