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HC News: हाईकोर्ट का सख्त रुख: ‘अधिकारियों की सुस्ती और ढिलाई पर पर्दा नहीं डाल सकते कोर्ट’, राज्य सरकार की 477 दिनों की देरी से दाखिल अपील खारिज

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By CourtNews Desk On 06 Aug, 2026
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Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने 477 दिन की देरी से दायर राज्य सरकार की एलपीए पर विलंब माफी देने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही अपील भी स्वतः खारिज हो गई। मामला जय प्रकाश चौधरी से संबंधित है। राज्य सरकार ने 13 फरवरी 2024 को पारित एकलपीठ के आदेश को चुनौती देते हुए एलपीए दायर की थी। विलंब माफी आवेदन में सरकार ने प्रमाणित प्रति प्राप्त करने, अभ्यावेदन पर सुनवाई, विधिक राय लेने, अभिलेख जुटाने और फाइल के विभिन्न विभागों में घूमने को देरी का कारण बताया। खंडपीठ ने कहा कि आवेदन में केवल विभागीय प्रक्रिया का विवरण दिया गया है, लेकिन यह नहीं बताया गया कि प्रत्येक चरण में इतना समय क्यों लगा। अदालत ने पाया कि एकलपीठ का आदेश 13 फरवरी 2024 को पारित हुआ, जबकि उसकी प्रमाणित प्रति के लिए आवेदन ही दो माह बाद किया गया। इसके बाद अभ्यावेदन पर सुनवाई पूरी होने के बावजूद अंतिम निर्णय लेने और सूचित करने में लगभग छह माह लगा, जबकि एकलपीठ ने छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।

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अदालत ने यह भी कहा कि सरकार ने अवमानना याचिका दायर होने के बाद ही अपील की प्रक्रिया शुरू की, जिससे विभाग की उदासीनता स्पष्ट होती है। खंडपीठ ने कहा कि फाइल का विभागों में घूमना, कानूनी राय लेना और प्रशासनिक स्वीकृति जैसी सामान्य दलीलें सीमा अधिनियम के तहत “पर्याप्त कारण” नहीं मानी जा सकतीं। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सीमा अधिनियम सरकार पर भी समान रूप से लागू होता है और सरकारी सुस्ती या लापरवाही को न्यायिक संरक्षण नहीं दिया जा सकता। पर्याप्त कारण नहीं मिलने पर 477 दिन की देरी माफ करने से इनकार करते हुए अदालत ने विलंब माफी याचिका और एलपीए दोनों खारिज कर दी।

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