Ranchi News: विशेष PMLA (प्रीवेन्शन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) अदालत ने प्रयाग ग्रुप के अरबों रुपये के वित्तीय घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बंद समूह के संस्थापक निदेशक बासुदेव बागची की जमानत याचिका खारिज कर दी है। विशेष PMLA न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने मामले की गंभीरता और निवेशकों के साथ हुई धोखाधड़ी को देखते हुए आरोपी को राहत देने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने याचिका पर दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद 24 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
बिना अनुमति चलाईं अवैध निवेश योजनाएं प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के अनुसार, प्रयाग ग्रुप की दो मुख्य कंपनियों—’प्रयाग इन्फोटेक हाई-राइज लिमिटेड’ और ‘प्रयाग इन्फोटेक नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड’ ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की अनिवार्य स्वीकृति के बिना गैर-कानूनी तरीके से निवेश योजनाएं संचालित की थीं। कंपनी के एजेंटों ने आम लोगों और छोटे निवेशकों को जमा पूंजी पर असामान्य रूप से अधिक रिटर्न देने का प्रलोभन देकर जाल में फंसाया। 31 मार्च 2016 तक इन कंपनियों ने कुल ₹2,850 करोड़ रुपये जुटाए, जिसमें से ₹1,800 करोड़ रुपये से अधिक की मूल राशि निवेशकों को लौटाना बाकी है।
निवेशकों के पैसे से खरीदीं निजी संपत्तियां जांच एजेंसी ने अदालत के सामने तथ्य रखे कि निवेशकों से ली गई रकम को नियमानुसार वैध व्यावसायिक गतिविधियों में लगाने के स्थान पर समूह की अन्य सहायक कंपनियों में शेल खातों के जरिए डाइवर्ट कर दिया गया। इस काली कमाई का बड़ा हिस्सा जमीन, लक्जरी होटल, फिल्म सिटी प्रोजेक्ट्स और अन्य अचल संपत्तियां खरीदने में खपाया गया। साथ ही, निदेशकों ने इस राशि का इस्तेमाल भारी-भरकम वेतन और निजी वित्तीय लाभों के लिए किया।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बासुदेव बागची समूह का मुख्य सर्वेसर्वा और संस्थापक निदेशक था, जिसने इस पूरे वित्तीय तंत्र की साजिश रची। ED ने इस मामले में साल 2019 में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी। बासुदेव बागची और सह-निदेशक अविक बागची वर्तमान में कोलकाता की अलीपुर प्रेसीडेंसी जेल में बंद हैं।