Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने गंभीर और लाइलाज बीमारियों से जूझ रहे शिक्षकों, उनके जीवनसाथी या बच्चों के इलाज के सिलसिले में अंतर-जिला तबादले की मांग को लेकर दायर याचिकाओं पर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने पश्चिमी सिंहभूम जिला शिक्षा स्थापना समिति के 24 जुलाई 2025 के उस निर्णय को पूरी तरह निरस्त कर दिया है, जिसके तहत शिक्षकों के अंतर-जिला तबादले के दावों को खारिज कर दिया गया था। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सभी याचिकाकर्ताओं के रिकॉर्ड तुरंत प्राथमिक शिक्षा निदेशक के पास भेजें। साथ ही, तबादला नीति के प्रावधानों के अनुसार मंजूरी देते हुए 10 सप्ताह के भीतर तबादला आदेश जारी करने की प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है।
90 शिक्षकों ने दी थी चुनौती:
इस मामले में पश्चिमी सिंहभूम जिले के प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत 90 शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर जिला शिक्षा स्थापना समिति के फैसले को चुनौती दी थी। अदालत में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरीय अधिवक्ता मनोज टंडन ने पक्ष रखा। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि राज्य सरकार की स्थापित तबादला नीति के तहत मेडिकल बोर्ड ने उनकी या उनके परिजनों की गंभीर बीमारी से जुड़े मामलों को पूरी तरह सही पाया था, इसके बावजूद जिला स्तर पर उनके तबादले के प्रस्तावों को खारिज कर दिया गया।
अदालत की सख्त टिप्पणी:
सुनवाई के दौरान जिला प्रशासन की ओर से तर्क दिया गया था कि शिक्षकों के तबादले से स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन का यह निर्णय राज्य सरकार की नीति के विपरीत है। जब मेडिकल जांच में शिक्षकों के मामले नीति के दायरे में सही पाए गए थे, तो जिला प्राधिकार को उनके दावे खारिज करने के बजाय नियमानुसार मंजूरी के लिए रिकॉर्ड प्राथमिक शिक्षा निदेशक के पास भेजना चाहिए था। हाईकोर्ट के इस फैसले से गंभीर बीमारियों का सामना कर रहे दर्जनों शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है।

