Ranchi News: झारखंड के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए जाने पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने गुरुवार को राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी को शो-कॉज नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने पूछा है कि अदालत के आदेश का अनुपालन नहीं किए जाने पर क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर 2026 को होगी और तीनों अधिकारियों को इसके पहले अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। सुनवाई के दौरान डीजीपी भी अदालत में उपस्थित थीं।
मुख्य बातें:
अवमानना का नोटिस: कोर्ट ने कहा कि पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के संबंध में पूर्व में स्पष्ट आदेश दिए गए थे, लेकिन अब तक अनुपालन नहीं हुआ। सरकार शपथ पत्र में वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के बजाय टालमटोल का रवैया अपना रही है।
450 से अधिक हिरासत में मौतें: अदालत ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि वर्ष 2018 के बाद से राज्य में 450 से अधिक हिरासत में मौत के मामले सामने आ चुके हैं, इसके बावजूद थानों में सीसीटीवी नहीं लगना दुर्भाग्यपूर्ण है।
चार बार टेंडर के बाद भी नतीजा सिफर: कोर्ट ने कहा कि सीसीटीवी लगाने के लिए अब तक चार बार टेंडर निकाले जा चुके हैं, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। साथ ही, डीजीपी द्वारा यह जिम्मेदारी गृह विभाग पर डालने के बयान को कोर्ट ने गैर-जिम्मेदाराना बताया।
तरुण महतो हिरासत प्रताड़ना मामला: यह पूरा मामला वर्ष 2025 में इचागढ़ निवासी (वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के प्रत्याशी) तरुण महतो की कथित पुलिस हिरासत में पिटाई से जुड़ा है। 19 नवंबर 2025 की रात पुलिस द्वारा थर्ड डिग्री इस्तेमाल करने की शिकायत उनकी पत्नी ने हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर की थी, जिस पर अदालत ने स्वतः संज्ञान लिया था।

