Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने रांची के थानों में सीसीटीवी कैमरों के खराब होने पर सख्त नाराजगी जताई है। फिरोज अंसारी की बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को जिले के सभी थानों के सीसीटीवी कैमरों की स्थिति की जांच करने और जहां भी कैमरे खराब हैं, उन्हें तत्काल दुरुस्त कराकर सुचारू रूप से संचालित करने का कड़ा निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला? मामला डोरंडा थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां प्रार्थी फिरोज अंसारी ने अपने बच्चों को अवैध हिरासत से मुक्त कराने और कोर्ट में पेश करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
4 दिनों तक हिरासत में रखने का आरोप: याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रार्थी के बच्चों को बिना कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज किए चार दिनों तक गैर-कानूनी तरीके से थाने में बैठाकर रखा गया।
हाईकोर्ट पहुंचते ही भेजा जेल: प्रार्थी का कहना है कि जब उसने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका दाखिल की, तब आनन-फानन में पुलिस ने बताया कि बच्चों को जेल भेज दिया गया है।
कोर्ट ने तलब किया था फुटेज: इन गंभीर आरोपों की सच्चाई जानने के लिए पूर्व की सुनवाई में अदालत ने डोरंडा थाना प्रभारी को संबंधित अवधि का सीसीटीवी फुटेज पेश करने का आदेश दिया था।
थाना प्रभारी का जवाब और कोर्ट की तल्खी: सुनवाई के दौरान डोरंडा थाना प्रभारी ने कोर्ट को बताया कि संबंधित समय का सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं कराया जा सकता, क्योंकि उस दौरान थाने का सीसीटीवी कैमरा खराब था।
इस टालमटोल रवैये पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए अदालत ने कहा कि थानों में सीसीटीवी कैमरों का निरंतर काम करना बेहद अनिवार्य है, ताकि पुलिस की कार्यशैली व गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके और आवश्यक मामलों की निष्पक्ष जांच के लिए फुटेज मिल सके।
मामले में प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता सूरज किशोर प्रसाद ने पक्ष रखा। हाईकोर्ट इस बेहद संवेदनशील मामले पर अब सोमवार को अगली सुनवाई करेगा।

