Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने जामताड़ा के नारायणपुर प्रखंड स्थित केंदुआ मौजा के प्रधान पद को लेकर करीब चार दशक से चल रहे विवाद में सुल्तान मियां को राहत दी है। न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत ने 7 अगस्त 2026 को फैसला सुनाते हुए संताल परगना प्रमंडल के आयुक्त द्वारा 6 जून 2018 को पारित आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने 1982 में सुल्तान मियां की प्रधान पद पर हुई नियुक्ति को बरकरार रखते हुए अनुमंडल पदाधिकारी और उपायुक्त के पुराने आदेशों को बहाल कर दिया। सुल्तान मियां ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आयुक्त के आदेश को चुनौती दी थी। सुल्तान मियां के पिता स्वर्गीय कादिर मियां केंदुआ मौजा के अंतिम प्रधान थे। उनके निधन के बाद सुल्तान मियां ने संताल परगना काश्तकारी अधिनियम के तहत प्रधान पद के लिए आवेदन दिया था। नारायणपुर के तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी ने जांच के बाद 29 सितंबर 1982 को उन्हें प्रधान नियुक्त किया था। इसके खिलाफ कादिर मियां के पोते इस्लाम मियां ने राजस्व अपील की, लेकिन उपायुक्त ने 19 अक्टूबर 1985 को सुल्तान मियां की नियुक्ति को सही ठहराया।
इसके बाद इस्लाम मियां ने आयुक्त के समक्ष पुनरीक्षण याचिका दाखिल की। आयुक्त ने 6 जून 2018 को दोनों निचली अदालतों के आदेशों को पलटते हुए सुल्तान मियां को कादिर मियां का जैविक पुत्र नहीं माना। आयुक्त ने उनके जन्म और वंश को लेकर उठाए गए विवाद के आधार पर उन्हें प्रधान पद के लिए अयोग्य माना था। हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों सक्षम अधिकारियों ने जांच के बाद सुल्तान मियां के पक्ष में समान निष्कर्ष दिया था। पुनरीक्षण अधिकारी अपीलीय अदालत की तरह साक्ष्यों का नए सिरे से मूल्यांकन नहीं कर सकता। आयुक्त ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर तथ्यों का पुनर्मूल्यांकन किया, इसलिए उनका आदेश अधिकार क्षेत्र की स्पष्ट त्रुटि से ग्रस्त है। अदालत ने कहा कि सुल्तान मियां के जैविक पुत्र होने या नहीं होने का विवादित तथ्य संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य की आवश्यकता होगी। हाईकोर्ट ने इस मामले में इस्लाम मियां को सक्षम दीवानी अदालत में मुकदमा दायर करने की स्वतंत्रता दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि वह सुल्तान मियां के दावे को गलत साबित कर पाते हैं तो प्रधान पद पर अपने वंशानुगत अधिकार का दावा कर सकते हैं।

